डोसा भारत के सबसे पसंदीदा दक्षिण भारतीय व्यंजनों में से एक है। इसे खाने के तरीके को लेकर आमतौर पर कोई खास नियम नहीं माना जाता, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने इसी मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है। वीडियो में एक एटिकेट कोच डोसा खाने का तरीका समझाती नजर आ रही हैं। उनका अंदाज देखकर सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल कर दिया—“डोसा खाने का ये कौन सा तरीका है भाई?”
एटिकेट कोच ने बताया डोसा खाने का तरीका
वायरल वीडियो में एटिकेट कोच रेस्टोरेंट में बैठकर डोसा खाने के तरीके का प्रदर्शन करती दिखाई देती हैं। उनका मकसद खाने के दौरान टेबल मैनर्स और शिष्टाचार समझाना बताया जा रहा है।
वीडियो में वह डोसे को काटने, सांभर और चटनी के साथ खाने तथा प्लेट में भोजन को व्यवस्थित रखने का तरीका दिखाती हैं। हालांकि, उनके बताए तरीके को देखकर कई लोगों को यह सामान्य से काफी अलग लगा।
सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस
वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स दो हिस्सों में बंट गए। कुछ लोगों ने एटिकेट कोच की बात का समर्थन करते हुए कहा कि औपचारिक जगहों पर खाने के कुछ शिष्टाचार होते हैं और उन्हें जानना अच्छी बात है।
वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने इसे जरूरत से ज्यादा नियम बनाने वाला तरीका बताया। यूजर्स का कहना है कि डोसा स्वाद लेकर खाने की चीज है, इसे खाने के लिए इतनी जटिल प्रक्रिया की जरूरत नहीं है।
एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि अगर डोसा खाने के लिए भी इतनी ट्रेनिंग चाहिए तो फिर घर पर इसे कैसे खाया जाए।
क्या भारतीय खाने के भी होते हैं एटिकेट?
टेबल मैनर्स की बात करें तो अलग-अलग देशों और संस्कृतियों में भोजन करने के अलग-अलग तरीके होते हैं। पश्चिमी देशों में चाकू-कांटे के इस्तेमाल से लेकर बैठने और प्लेट रखने तक के नियम माने जाते हैं।
भारत में भी औपचारिक डिनर या किसी खास समारोह में खाने के कुछ शिष्टाचार होते हैं। हालांकि, पारंपरिक भारतीय भोजन में हाथ से खाना भी पूरी तरह सामान्य और सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य तरीका है।
इसलिए डोसा खाने का कोई एक सार्वभौमिक 'सही' तरीका नहीं कहा जा सकता।
लोगों ने कहा- ‘भाई, डोसा है, एग्जाम नहीं’
वीडियो पर कई यूजर्स ने मजेदार कमेंट किए। किसी ने लिखा कि डोसा खाने के लिए अब एटिकेट क्लास भी करनी पड़ेगी। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि जिस तरह से वीडियो में डोसा खाने का तरीका बताया जा रहा है, उससे खाने का मजा ही खत्म हो जाएगा।
कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि शिष्टाचार जरूरी है, लेकिन खाने को लेकर अनावश्यक नियम बनाना सही नहीं है।
एटिकेट का असली मतलब क्या?
एटिकेट का उद्देश्य लोगों को असहज करना नहीं, बल्कि सार्वजनिक जगहों पर दूसरों का सम्मान करते हुए व्यवहार करना है। भोजन करते समय मुंह बंद रखकर खाना, दूसरों की प्लेट में हाथ न डालना, टेबल साफ रखना और आसपास बैठे लोगों को असुविधा न पहुंचाना जैसे सामान्य नियम काफी होते हैं।
डोसा किस तरह मोड़ा जाए या किस क्रम में चटनी में डुबोया जाए, इसे लेकर अलग-अलग लोगों की अपनी पसंद हो सकती है।
वायरल वीडियो ने छेड़ी मजेदार बहस
एटिकेट कोच का वीडियो भले ही खाने के शिष्टाचार को लेकर बनाया गया हो, लेकिन सोशल मीडिया पर इसने भारतीय खान-पान और मॉडर्न टेबल मैनर्स को लेकर मजेदार बहस छेड़ दी है।
आखिर डोसा खाने का असली मजा तभी है, जब उसे अपनी पसंद के तरीके से खाया जाए—चाहे हाथ से, चम्मच से या एटिकेट कोच के बताए अंदाज में।

