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एम्बुलेंस के अंदर क्या होता है? 108 दबाते ही आ जाती है गाड़ी, मौजूद होती है ऐसी-ऐसी सुविधाएं
 

एम्बुलेंस के अंदर क्या होता है? 108 दबाते ही आ जाती है गाड़ी, मौजूद होती है ऐसी-ऐसी सुविधाएं

सड़क हादसा हो, अचानक किसी की तबीयत बिगड़ जाए या गर्भवती महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाना हो—ऐसे वक्त में कुछ मिनट भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। भारत के कई राज्यों में 108 एंबुलेंस सेवा इसी इमरजेंसी जरूरत के लिए इस्तेमाल की जाती है। फोन पर 108 डायल करने के बाद एंबुलेंस मरीज तक पहुंचती है और जरूरत के मुताबिक उसे अस्पताल ले जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एंबुलेंस के अंदर आखिर क्या-क्या होता है? बाहर से देखने में यह एक सामान्य वैन जैसी लग सकती है, लेकिन इसके अंदर मरीज को रास्ते में प्राथमिक चिकित्सा देने के लिए कई जरूरी उपकरण मौजूद हो सकते हैं।

एंबुलेंस के अंदर होता है मेडिकल सेटअप

सामान्य एंबुलेंस में मरीज को लेटाने के लिए स्ट्रेचर सबसे महत्वपूर्ण उपकरणों में से एक होता है। इसे इस तरह बनाया जाता है कि मरीज को सुरक्षित तरीके से एंबुलेंस के अंदर लाया और बाहर निकाला जा सके।इसके अलावा मरी की स्थिति के अनुसार ऑक्सीजन सिलेंडर या ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम, मास्क और अन्य जरूरी उपकरण भी उपलब्ध हो सकते हैं।अगर किसी मरीज को सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ उपलब्ध संसाधनों के अनुसार उसे शुरुआती सहायता दे सकता है।

ऑक्सीजन से लेकर जरूरी मेडिकल उपकरण तक

एंबुलेंस में कई तरह के प्राथमिक उपचार उपकरण रखे जा सकते हैं। इनमें ब्लड प्रेशर मापने का उपकरण, पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर और प्राथमिक चिकित्सा सामग्री शामिल हो सकती है।कुछ एडवांस्ड एंबुलेंस में मरीज की हालत पर नजर रखने के लिए मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर और अन्य जीवनरक्षक उपकरण भी उपलब्ध होते हैं।हालांकि हर 108 एंबुलेंस में एक जैसे उपकरण हों, यह जरूरी नहीं है। एंबुलेंस की श्रेणी और संबंधित राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के अनुसार सुविधाएं बदल सकती हैं।

हादसे के मरीज के लिए भी खास इंतजाम

सड़क दुर्घटना के बाद मरीज को तुरंत उठाकर ले जाना कई बार नुकसानदायक हो सकता है। ऐसे मामलों में एंबुलेंस में मरीज को स्थिर रखने के लिए अलग-अलग तरह के सपोर्ट उपकरण इस्तेमाल किए जा सकते हैं।जैसे स्पाइन बोर्ड, सर्वाइकल कॉलर और स्ट्रैप जैसी चीजें चोट की स्थिति में मरीज को सुरक्षित तरीके से संभालने में मदद करती हैं।इनका इस्तेमाल प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा मरीज की स्थिति देखकर किया जाता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए भी मददगार

108 जैसी आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं का एक बड़ा इस्तेमाल गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाने में भी होता है। प्रसव पीड़ा या किसी अन्य आपात स्थिति में महिला को जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना जरूरी हो सकता है।कुछ एंबुलेंस में गर्भवती महिला की जरूरत के हिसाब से आवश्यक मेडिकल सामग्री और प्रशिक्षित स्टाफ की सुविधा उपलब्ध होती है। हालांकि डिलीवरी से संबंधित सुविधाएं एंबुलेंस के प्रकार और स्थानीय सेवा व्यवस्था पर निर्भर करती हैं।

रास्ते में सिर्फ गाड़ी नहीं, मेडिकल सहायता भी

एंबुलेंस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज को अस्पताल पहुंचाने के दौरान उसकी हालत पर नजर रखी जा सकती है। कई सेवाओं में प्रशिक्षित ईएमटी यानी इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन भी मौजूद रहते हैं।जरूरत पड़ने पर वे अस्पताल पहुंचने से पहले प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करा सकते हैं। इससे गंभीर मरीज को अस्पताल तक पहुंचने के दौरान जरूरी सहायता मिल सकती है।

108 दबाते ही कैसे पहुंचती है एंबुलेंस?

जब किसी राज्य में 108 आपातकालीन सेवा उपलब्ध हो और व्यक्ति इस नंर पर कॉल करता है, तो कॉल सेंटर के जरिए मरीज की स्थिति और लोकेशन जैसी जरूरी जानकारी ली जा सकती है। इसके बाद उपलब्ध एंबुलेंस को घटनास्थल की ओर भेजा जाता है।इसी वजह से कॉल करते समय सही लोकेशन, मरीज की स्थिति और संपर्क नंबर स्पष्ट बताना बेहद जरूरी होता है। इससे एंबुलेंस कर्मियों को सही जगह तक पहुंचने में मदद मिलती है।

हर एंबुलेंस ICU नहीं होती

यह बात समझना भी जरूरी है कि सड़क पर दिखाई देने वाली हर 108 एंबुलेंस को मोबाइल ICU समझना सही नहीं है। कुछ एंबुलेंस बेसिक लाइफ सपोर्ट के लिए होती हैं, जबकि कुछ में ज्यादा उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं।यानी एंबुलेंस के अंदर मौजूद सुविधाएं वाहन की श्रेणी और संबंधित स्वास्थ्य सेवा पर निर्भर करती हैं।

आखिर क्यों जरूरी है 108?

इमरजेंसी के समय एंबुलेंस सिर्फ मरीज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने वाली गाड़ी नहीं होती। सही उपकरण, प्रशिक्षित कर्मचारी और समय पर अस्पताल तक पहुंचाना—तीनों मिलकर इसकी भूमिका को महत्वपूर्ण बनाते हैं।इसलिए किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में घबराने के बजाय 108 जैसी उपलब्ध आपातकालीन सेवा से संपर्क करना और ऑपरेटर को सही जानकारी देना बेहद अहम हो सकता है।

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