Viral Video: क्या इस्लाम में कंडोम इस्तेमाल करना हराम है? मौलवी के बयान और 8-10 बच्चों पर छिड़ी बहस
इस्लाम में कंडोम के इस्तेमाल और परिवार नियोजन को लेकर एक बातचीत सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन रही है। वायरल बातचीत में एक होस्ट अपने मेहमान से सवाल करता है कि क्या इस्लाम में कंडोम का इस्तेमाल करना हराम है। जवाब में मेहमान कहता है कि कंडोम का इस्तेमाल अपने आप में हराम नहीं है और इसके समर्थन में वह सऊदी अरब में इसकी सार्वजनिक बिक्री का उदाहरण देता है।
कंडोम को लेकर होस्ट ने उठाया सवाल
बातचीत के दौरान होस्ट सवाल करता है कि अगर कंडोम का इस्तेमाल गलत नहीं है, तो कुछ परिवारों में 8 से 10 बच्चे क्यों होते हैं? इस पर मेहमान कहता है कि कई लोगों के मन में धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक सोच के कारण कंडोम खरीदने को लेकर झिझक होती है।
मेहमान यह भी बताता है कि कुछ लोग परिवार नियोजन के साधन खरीदने में शर्म महसूस करते हैं। उसके मुताबिक, ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं के आने से ऐसे उत्पाद खरीदना पहले की तुलना में आसान हुआ है।
धार्मिक मान्यताओं और परिवार नियोजन पर चर्चा
Host: क्या मुस्लिम्स में Condom इस्तेमाल करना भी हराम है?
— Avantika (@babyavantika007) October 15, 2026
Guest: ये तो आपने बड़ा ही अजीब दुविधा वाला सवाल पूछ लिया, नहीं हराम नहीं..
Host: फिर इतने बच्चे क्यों पैदा कर रहे हैं 8-10
Guest: मैने टीवी पर एक टोपी वाले मौलाना को देखा, जिसमें एंकर पूछ रही है कि कोंडोम use कर सकते… pic.twitter.com/9BplN3KfQ4
वायरल बातचीत में मेहमान कुछ धार्मिक उपदेशकों के कथित बयानों का जिक्र करते हुए कहता है कि ज्यादा बच्चे पैदा करने को धार्मिक गर्व से जोड़कर देखा जाता है। वह इस सोच पर सवाल उठाते हुए तर्क देता है कि पुराने समय की सामाजिक और ऐतिहासिक परिस्थितियां आज से अलग थीं।
हालांकि, किसी एक व्यक्ति के बयान के आधार पर इस्लाम की सभी मान्यताओं के बारे में निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। धार्मिक विद्वानों के बीच परिवार नियोजन के कुछ पहलुओं पर अलग-अलग विचार हो सकते हैं।
क्या इस्लाम में कंडोम का इस्तेमाल हराम है?
इस्लामी विद्वानों की कई व्याख्याओं में अस्थायी गर्भनिरोध के तरीकों को कुछ शर्तों के साथ स्वीकार्य माना गया है। हालांकि, इस विषय पर राय संबंधित परिस्थितियों, पति-पत्नी की सहमति और अपनाए जाने वाले तरीके के आधार पर अलग हो सकती है। इसलिए इसे सभी परिस्थितियों में हराम या हलाल बताना उचित नहीं है।
फिलहाल, वायरल बातचीत के जरिए गर्भनिरोध, धार्मिक व्याख्याओं और सामाजिक झिझक को लेकर बहस हो रही है। यह चर्चा परिवार नियोजन पर सही जानकारी और संवेदनशील संवाद की जरूरत को भी सामने लाती है।

