वोटर लिस्ट में SIR को लेकर बवाल! प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर ले गई पुलिस, VIDEO आया सामने
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 2 अक्टूबर को चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान बड़ा पुलिस एक्शन देखने को मिला। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर सवाल उठा रहे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर के पास टांगकर उठा लिया है।
— Rahul Kumar (@MukAn_X) October 2, 2026
ये लड़की चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग करने पहुँची थी।
मुद्दा मतदाता सूची के SIR में गड़बड़ी और लाखों वोटरों के नाम कटने का है।
पुलिस ने रास्ते बंद कर दिए थे और लोगों को अंदर जाने ही नहीं दे रही।… pic.twitter.com/W989L9Y45J
नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर के पास टांगकर उठा लिया है।
— Rahul Kumar (@MukAn_X) October 2, 2026
ये लड़की चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग करने पहुँची थी।
मुद्दा मतदाता सूची के SIR में गड़बड़ी और लाखों वोटरों के नाम कटने का है।
पुलिस ने रास्ते बंद कर दिए थे और लोगों को अंदर जाने ही नहीं दे रही।… pic.twitter.com/W989L9Y45J
प्रदर्शन में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई छात्र नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल हुए। पुलिस ने नेहा बोरा समेत बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और उन्हें बसों के जरिए अलग-अलग पुलिस स्टेशनों की ओर ले जाया गया।रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने और नई दिल्ली इलाके में लागू प्रतिबंधों का हवाला देते हुए कार्रवाई की। पुलिस ने जंतर-मंतर की तरफ जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग की थी और कई जगह प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया।
500 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेने की रिपोर्ट
प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। कई रिपोर्ट्स में 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है, जबकि पुलिस के एक स्रोत ने संख्या करीब 700 तक बताई।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका मुद्दा मतदाता सूची और वोट देने के अधिकार से जुड़ा है। वहीं पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति प्रदर्शन और लागू प्रतिबंधों के बावजूद भीड़ जुटने के कारण कार्रवाई की गई।इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर अलग-अलग थानों में ले जाने के वीडियो भी सामने आए हैं।
पूरे घटनाक्रम के बीच SIR, मतदाता सूची में नामों के कथित बदलाव और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है। हालांकि, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों और उनके आधार की अलग-अलग पक्षों से अलग-अलग व्याख्या की जा रही है।

