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बारिश के लिए अनोखी परंपरा: आंध्र के मंदिर में 7 अविवाहित युवकों ने किया 108 पात्रों से अभिषेक, पत्थर पर युवक के घूमने से मचा कौतूहल

बारिश के लिए अनोखी परंपरा: आंध्र के मंदिर में 7 अविवाहित युवकों ने किया 108 पात्रों से अभिषेक, पत्थर पर युवक के घूमने से मचा कौतूहल

देश के कई हिस्सों में बारिश के लिए लोग तरह-तरह की धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं निभाते हैं। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के उरावकोंडा स्थित जम्मी अंकलम्मा मंदिर में भी अच्छी बारिश की कामना को लेकर वर्षों पुरानी अनोखी रस्म निभाई गई। इस धार्मिक अनुष्ठान में 7 अविवाहित युवकों ने हिस्सा लिया और देवी से पर्याप्त वर्षा की प्रार्थना की।

मान्यता है कि इस विशेष पूजा के बाद देवी अंकलम्मा की कृपा से क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है और किसानों को राहत मिलती है।

108 पात्रों से किया जल अभिषेक

परंपरा के अनुसार, सातों अविवाहित युवकों ने 108 पात्रों से शमी और नाग वृक्ष का जल अभिषेक किया। इसके बाद मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की गई।

पूजा के दौरान 108 नारियल फोड़े गए और देवी को 108 नींबू की माला अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ अनुष्ठान पूरा किया और अच्छी बारिश की कामना की।

पत्थर पर युवक के घूमने से लोग हुए हैरान

इस पूजा का सबसे आकर्षक और रहस्यमयी हिस्सा उस समय देखने को मिला, जब अनुष्ठान के अंत में एक युवक ज्वार पर रखे गोल पत्थर पर बैठ गया। इसके बाद वह पत्थर के साथ अपने आप घूमने लगा।

इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु हैरान रह गए। लोगों ने इसे देवी की शक्ति और आशीर्वाद से जोड़कर देखा। कई श्रद्धालुओं ने इस अनोखे क्षण को अपने मोबाइल कैमरों में भी कैद किया।

पीढ़ियों से चली आ रही है परंपरा

स्थानीय लोगों के अनुसार, जम्मी अंकलम्मा मंदिर में बारिश के लिए यह रस्म कई पीढ़ियों से चली आ रही है। हर साल क्षेत्र के लोग इस परंपरा में शामिल होकर देवी से अच्छी बारिश की प्रार्थना करते हैं।

ग्रामीणों का विश्वास है कि यह पूजा किसानों के लिए शुभ संकेत लेकर आती है और देवी के आशीर्वाद से खेतों में अच्छी पैदावार होती है।

आस्था और परंपरा का अनोखा संगम

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम और खेती से जुड़ी कई लोक परंपराएं देखने को मिलती हैं। अनंतपुर की यह रस्म भी स्थानीय संस्कृति, आस्था और ग्रामीण जीवन से जुड़ी हुई है।

हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से बारिश प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करती है, लेकिन ऐसी परंपराएं लोगों की धार्मिक आस्था और सामुदायिक भावना को मजबूत करती हैं। जम्मी अंकलम्मा मंदिर में हुई यह पूजा भी इसी आस्था और विश्वास का प्रतीक बनी हुई है।

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