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अनोखा सरकारी स्कूल: रांची के प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ 2 छात्र, पढ़ाने के लिए तैनात हैं 2 शिक्षक; रोज बनता है मिड-डे मील

अनोखा सरकारी स्कूल: रांची के प्राथमिक विद्यालय में सिर्फ 2 छात्र, पढ़ाने के लिए तैनात हैं 2 शिक्षक; रोज बनता है मिड-डे मील

झारखंड की राजधानी रांची में एक ऐसा सरकारी स्कूल है, जहां छात्रों की संख्या बेहद कम है, लेकिन शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह संचालित हो रही है। थड़पखना स्थित राजकीयकृत प्राथमिक विद्यालय हिंदी में वर्तमान समय में केवल दो छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि उन्हें पढ़ाने के लिए दो शिक्षक तैनात हैं।

स्कूल में रोजाना दोनों बच्चों की उपस्थिति दर्ज की जाती है और उनके लिए नियमित रूप से मिड-डे मील भी तैयार किया जाता है। स्कूल की पूरी व्यवस्था पहले की तरह चल रही है, लेकिन छात्रों की कम संख्या चर्चा का विषय बनी हुई है।

5वीं तक की पढ़ाई, इसलिए घटे छात्र

जांच में सामने आया है कि इस इलाके में कई सरकारी और निजी स्कूल मौजूद हैं, जहां 10वीं और 12वीं तक की पढ़ाई होती है। बेहतर और अधिक कक्षाओं की सुविधा के कारण ज्यादातर अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला बड़े स्कूलों में करा रहे हैं।

यही वजह है कि पांचवीं कक्षा तक संचालित इस प्राथमिक विद्यालय में बच्चों की संख्या लगातार कम होती चली गई।

दो छात्रों के लिए पूरी व्यवस्था

स्कूल में भले ही छात्रों की संख्या सिर्फ दो है, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। दोनों छात्रों की नियमित कक्षाएं लगती हैं और शिक्षक उन्हें पढ़ाते हैं।

इसके अलावा सरकार की योजनाओं के तहत बच्चों को मिलने वाली सुविधाएं भी जारी हैं। स्कूल में मिड-डे मील योजना का संचालन भी किया जा रहा है।

शिक्षकों की जिम्मेदारी जारी

स्कूल में तैनात शिक्षक बच्चों की पढ़ाई को लेकर पूरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनका कहना है कि छात्र कम होने के बावजूद शिक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है।

शिक्षकों के अनुसार, उनका उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, चाहे संख्या कितनी भी हो।

स्कूलों में घटती छात्र संख्या बनी चुनौती

यह मामला सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या की बड़ी समस्या को भी सामने लाता है। कई प्राथमिक विद्यालयों में आसपास के बड़े स्कूलों की उपलब्धता के कारण नामांकन कम हो रहा है।

शिक्षा विभाग के लिए अब चुनौती यह है कि छोटे स्कूलों में भी अभिभावकों का भरोसा कायम रखा जाए और बच्चों की संख्या बढ़ाई जा सके। रांची का यह स्कूल फिलहाल अपनी अनोखी स्थिति के कारण चर्चा में है, जहां दो बच्चों के लिए दो शिक्षक पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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