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लड़कियों की आबरू बचाने के लिए यहां गर्म पत्थर से किया जाता है ये काम

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दुनियाभर में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं आम होती जा रही हैं, और इन्हें रोकने के लिए अलग-अलग देशों में विभिन्न कानून बनाए गए हैं। जहां एक ओर महिलाएं अपनी सुरक्षा के लिए पेपर स्प्रे या पॉकेट नाइफ जैसे उपायों का इस्तेमाल करती हैं, वहीं दूसरी ओर एक ऐसी प्रथा भी प्रचलित है जिसे "चेस्ट आयरनिंग" कहा जाता है। यह प्रथा महिलाओं के स्तनों के विकास को रोकने के लिए उन्हें गर्म पत्थर से मसलने या जलाने से जुड़ी हुई है, ताकि उनके शारीरिक विकास को नियंत्रित किया जा सके।

यह प्रथा उतनी ही पुरानी है जितनी कि इसकी प्रचलन की अवधि। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि, हालांकि यह प्रथा पुरानी है, फिर भी इसका चलन आज भी जारी है और कई विकसित देशों में भी इसे लागू किया जाता है। "चेस्ट आयरनिंग" का मतलब है, महिलाओं के स्तनों का इस तरह से दबाना या गर्म पत्थर से मसाज करना कि उनका उभार न दिखे। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह माना जाता है कि इससे महिलाओं को यौन उत्पीड़न या बलात्कार से बचाया जा सके।

यह प्रथा विशेष रूप से अफ्रीकी देशों और कुछ हिस्सों में प्रचलित है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि यह यूनाइटेड किंगडम जैसे आधुनिक और विकसित देशों में भी मौजूद है। खबरों के अनुसार, हजारों लड़कियां इस प्रथा का शिकार बनती हैं। इस प्रक्रिया में अक्सर मां, दादी या नानी जैसी महिलाएं गर्म पत्थर से लड़कियों के स्तनों पर मसाज करती हैं, जिससे उनके टिशूज को नुकसान पहुँचता है और उनकी ग्रोथ रुक जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह माना जाता है कि इससे उनके शरीर का यौन आकर्षण कम हो और वे उत्पीड़न से बच सकें।

चिकित्सक इस प्रथा को बेहद खतरनाक मानते हैं। यह न केवल शारीरिक रूप से महिलाओं के लिए नुकसानदायक है, बल्कि मानसिक रूप से भी इसे भयंकर असर डालता है। शारीरिक रूप से महिलाओं को इस प्रक्रिया से भयंकर दर्द होता है और यह उनके शारीरिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक यह प्रथा महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का सामना भी करा सकती है, क्योंकि गर्म पत्थरों से किए गए अत्याचार से शरीर में अनियमित बदलाव हो सकते हैं, जो कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म दे सकते हैं।

समाज में इस प्रथा को लेकर कई तरह की बहसें होती हैं। कुछ लोग इसे सुरक्षा का एक तरीका मानते हैं, जबकि अन्य इसे महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन मानते हैं। यह तथ्य स्पष्ट है कि महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर उन्हें शारीरिक रूप से घायल करना या उनका शोषण करना किसी भी तरह से उचित नहीं है। इसके बजाय, महिलाओं की सुरक्षा के लिए समाज को और कानूनों को सख्त और प्रभावी बनाना चाहिए, ताकि ऐसी प्रथाओं का अंत किया जा सके और महिलाओं को एक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिल सके।

अंततः, यह जरूरी है कि हम ऐसे कृत्यों के खिलाफ आवाज उठाएं और एक ऐसी समाज की रचना करें, जहां महिलाओं को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा मिल सके, न कि उन्हें ऐसे खतरनाक और अंधविश्वासी प्रथाओं का शिकार बनाया जाए।

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