ये है जादुई चावल! पकाने के लिए नहीं पड़ती आग की जरूरत, ठंडे पानी में ही तैयार हो जाते हैं दाने
चावल भारतीय खानपान का अहम हिस्सा हैं। आमतौर पर चावल बनाने के लिए पानी के साथ गैस या किसी दूसरे ईंधन पर उन्हें उबालना पड़ता है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसे चावल के बारे में सुना है, जिन्हें पकाने के लिए आग की जरूरत ही न पड़े? सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसे ही खास चावलों को लेकर चर्चा होती रहती है, जिन्हें ठंडे पानी में डालने के बाद कुछ समय में खाने के लिए तैयार बताया जाता है। इसी वजह से इन्हें लोग मजाकिया अंदाज में जादुई चावल भी कहते हैं।
दरअसल, ऐसे चावल सामान्य कच्चे चावल से अलग होते हैं। इन्हें विशेष प्रक्रिया से पहले ही पकाया या आंशिक रूप से पकाकर फिर सुखाया जाता है। इस प्रक्रिया के कारण चावल के दाने दोबारा पानी सोखकर जल्दी नरम हो जाते हैं। यही वजह है कि इन्हें तैयार करने के लिए पारंपरिक तरीके से लंबे समय तक उबालने की जरूरत नहीं पड़ती।
इन चावलों को बनाने की प्रक्रिया में पहले चावल को गर्म पानी या भाप की मदद से पकाया जाता है। इसके बाद उनमें मौजूद नमी को नियंत्रित तरीके से निकाल दिया जाता है। जब ऐसे चावल को दोबारा पानी में डाला जाता है तो वे पानी को तेजी से सोखते हैं और अपनी पहले वाली संरचना के करीब पहुंच जाते हैं। हालांकि अलग-अलग उत्पादों की प्रक्रिया और उन्हें तैयार करने में लगने वाला समय अलग हो सकता है।
ऐसे चावल उन परिस्थितियों में खास तौर पर उपयोगी हो सकते हैं, जहां खाना पकाने के लिए गैस, बिजली या आग की सुविधा उपलब्ध न हो। यात्रा, आपदा राहत, सैन्य अभियानों या ऐसी जगहों पर जहां सीमित संसाधन हों, इस तरह के रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ काफी सुविधाजनक साबित हो सकते हैं।
हालांकि ठंडे पानी में चावल डालते ही तुरंत पक जाने की बात को लेकर सावधानी जरूरी है। हर तरह के इंस्टेंट या प्रोसेस्ड चावल ठंडे पानी में एक जैसा परिणाम नहीं देते। कुछ उत्पादों को गर्म पानी की जरूरत हो सकती है, जबकि कुछ को पानी में लंबे समय तक भिगोकर रखना पड़ सकता है। इसलिए किसी भी ऐसे उत्पाद को इस्तेमाल करने से पहले उसकी पैकेजिंग पर दिए निर्देशों को जरूर देखना चाहिए।
सोशल मीडिया पर ऐसे चावल को देखकर लोग इसे जादुई चावल कह रहे हैं, लेकिन इसके पीछे कोई रहस्य या जादू नहीं है। यह खाद्य प्रसंस्करण की तकनीक का नतीजा है, जिसके जरिए चावल को पहले से तैयार कर ऐसा बनाया जाता है कि वह दोबारा पानी मिलने पर जल्दी खाने योग्य हो जाए। यही तकनीक सामान्य चावल की तुलना में इसे खास और बेहद सुविधाजनक बनाती है।

