नींद में हो गई इतनी मग्न की पेपर नहीं दे पाई ये लड़की, इस वजह से सोती रही लगातार 3 हफ्ते
नींद के कारण कभी-कभी लोग अपने जरूरी काम टाल देते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि कोई इंसान तीन हफ्ते तक लगातार सोता रहा हो? ब्रिटेन से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है। यहां एक 21 साल की लड़की को ऐसी गहरी नींद आ गई कि उसके सभी महत्वपूर्ण काम छूट गए, यहां तक कि वह अपनी यूनिवर्सिटी की मुख्य परीक्षा में भी शामिल नहीं हो सकी।
रेयर सिंड्रोम से पीड़ित है Rhoda Rodriguez-Diaz
ब्रिटेन में रहने वाली 21 वर्षीय Rhoda Rodriguez-Diaz एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही हैं, जिसे 'क्लाइन-लेविन सिंड्रोम' (Kleine-Levin Syndrome) कहा जाता है। इस बीमारी के कारण Rhoda को अचानक गहरी नींद आ जाती है, और वह लगातार कई घंटों या दिनों तक सोती रहती हैं। हाल ही में इसी सिंड्रोम के चलते Rhoda लगभग तीन सप्ताह तक लगातार सोती रहीं।
उनकी इस लंबी नींद का असर उनके करियर पर भी पड़ा। लगातार तीन हफ्ते सोने की वजह से वह यूनिवर्सिटी की मुख्य परीक्षा में भाग नहीं ले सकीं, जो उनके शैक्षणिक जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी।
21 घंटे की रोजाना नींद
Rhoda ने बताया कि जब वह एक बार सो जाती हैं तो सामान्य रूप से लगभग 21 घंटे तक सोती रहती हैं। उन्हें इस बीमारी के बारे में सितंबर महीने में पता चला था। इसके बाद उन्होंने इलाज भी कराया, लेकिन कोई खास सुधार नहीं हो पाया। डॉक्टर्स के मुताबिक, इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, हालांकि उम्र के साथ इसके लक्षण कम होने की संभावना रहती है।
नींद के कारण जीवन के पल हो जाते हैं गायब
Rhoda ने अपनी इस अनोखी बीमारी के बारे में बात करते हुए कहा,
"जब मैं सो रही होती हूं, तब भी जीवन चलता रहता है। जब मैं उठती हूं तो ऐसा महसूस होता है कि मैंने अपने जीवन का एक हफ्ता मिस कर दिया है।"
उन्होंने आगे बताया कि बचपन में भी वे अपने दोस्तों के साथ ज्यादा समय नहीं बिता पाईं क्योंकि वह अक्सर लंबे समय तक सोती रहती थीं। इस वजह से कई लोग उन्हें आलसी समझते हैं, लेकिन असलियत में वे इस गंभीर स्थिति से जूझ रही हैं।
क्या है Kleine-Levin Syndrome?
Kleine-Levin Syndrome (KLS) एक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार लंबे समय तक सोने की प्रवृत्ति होती है। इस दौरान पीड़ित व्यक्ति सामान्य जीवन से पूरी तरह कट जाता है और अक्सर भ्रम, थकान और भूख में वृद्धि जैसी समस्याएं भी महसूस करता है। दुनिया भर में इसके बहुत कम मामले सामने आते हैं और यह अक्सर किशोरावस्था में शुरू होता है।
निष्कर्ष
Rhoda Rodriguez-Diaz का मामला यह दिखाता है कि कई बार ऐसी दुर्लभ बीमारियां इंसान के जीवन को किस हद तक प्रभावित कर सकती हैं। जहां एक तरफ सामान्य लोग नींद को आलस का नाम देते हैं, वहीं Rhoda जैसी युवतियां असली संघर्ष का सामना कर रही हैं। उम्मीद की जा रही है कि वैज्ञानिक और डॉक्टर भविष्य में इस बीमारी के लिए कोई प्रभावी इलाज विकसित कर सकें, ताकि पीड़ितों को एक सामान्य जीवन जीने का अवसर मिल सके।

