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दुनिया का वो चमत्कारी संत जिसने सभी धर्मो को माना बराबर, वीडियो देख खुद करें फैसला

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इस दौर में जहां धर्म के नाम पर अक्सर मतभेद और टकराव की खबरें सामने आती हैं, वहीं एक ऐसे चमत्कारी संत की कहानी भी है जिसने इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म माना। उन्होंने हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी धर्मों की शिक्षाओं को सम्मान दिया और उनके अनुयायी भी हर मजहब से जुड़े लोग बने। हम बात कर रहे हैं साईं बाबा की – वो संत जिनका नाम आज श्रद्धा और सबुरी का पर्याय बन चुका है।

कौन थे साईं बाबा?

शिरडी के साईं बाबा का जन्म और असली नाम आज भी रहस्य बना हुआ है। लेकिन इतना जरूर कहा जाता है कि वे 19वीं सदी में महाराष्ट्र के शिरडी गांव में पहुंचे और वहां अपनी आध्यात्मिक यात्रा शुरू की। बाबा न तो खुद को हिंदू कहते थे और न ही मुस्लिम, बल्कि वे कहते थे –

सबका मालिक एक।

उनका पहनावा मुस्लिम फकीरों जैसा था, लेकिन उनके कर्म और उपदेशों में हिंदू धर्म की झलक भी स्पष्ट दिखती थी। वे मस्जिद में रहते थे लेकिन मंदिरों का सम्मान भी करते थे।

सभी धर्मों को एक समान मानने वाले विचार

साईं बाबा ने हमेशा जात-पात, धर्म, ऊंच-नीच के भेद को नकारा। उनके शिष्य हिंदू भी थे, मुस्लिम भी, और कई ईसाई व सिख भी उनके बताए रास्ते पर चलते थे। उन्होंने यह संदेश दिया कि –

इंसान का धर्म वो है जो उसे सही राह दिखाए, और दूसरे की सेवा करना ही सच्चा इबादत है।

उनका यह दृष्टिकोण आज के समय में और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाता है, जब धार्मिक सहिष्णुता की सबसे अधिक आवश्यकता है।

चमत्कारों से भरी थी उनकी जिंदगी

साईं बाबा के जीवन में कई ऐसे चमत्कार जुड़े हैं जिन्हें देखकर लोगों की श्रद्धा और गहरी हो गई।

  • उन्होंने बीमारों को छूकर ठीक किया,

  • किसी को खाली हाथ नहीं लौटाया,

  • और कई बार तो बिना कहे ही भक्तों की परेशानी समझ कर उन्हें हल भी कर दिया।
    कहते हैं कि साईं बाबा के ‘उदी’ (राख) से गंभीर रोग भी ठीक हो जाते थे।

वीडियो में देखें वो पल जो लोगों की आंखें खोल देगा

हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसमें अलग-अलग धर्मों से जुड़े लोग एक साथ शिरडी में साईं बाबा की समाधि पर श्रद्धा से सिर झुकाते नजर आते हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक मुस्लिम बुजुर्ग बाबा की आरती में शामिल होता है, वहीं एक सिख परिवार चादर चढ़ाकर मन्नत मांगता है। यह दृश्य बताता है कि साईं बाबा का संदेश आज भी जीवित है।

निष्कर्ष

साईं बाबा केवल एक संत नहीं, बल्कि धर्मों की दीवारें तोड़ने वाले एक युगद्रष्टा थे। उन्होंने इंसान को इंसान से जोड़ने का काम किया। आज जब समाज में धर्म के नाम पर अलगाव हो रहा है, साईं बाबा जैसे संतों की सीख हमें फिर से जोड़ने की ताकत देती है।

आप भी वीडियो देखिए और खुद तय कीजिए – क्या साईं बाबा वाकई चमत्कारी संत नहीं बल्कि इंसानियत के सबसे बड़े प्रतीक थे?

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