पति के दिल का रास्ता पेट से नहीं? नई स्टडी में दावा- खाना न बनाने वाली पत्नियों की शादी ज्यादा खुशहाल
आपने अक्सर यह कहावत सुनी होगी कि “पति के दिल का रास्ता उसके पेट से होकर जाता है।” यही वजह है कि कई पत्नियां अपने पति की पसंद-नापसंद का ध्यान रखते हुए उनकी मनपसंद डिश बनाकर उन्हें खुश करने की कोशिश करती हैं। लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस पुरानी धारणा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अध्ययन में दावा किया गया है कि जो पत्नियां खाना बनाने की जिम्मेदारी नहीं उठातीं, उनकी शादीशुदा जिंदगी ज्यादा खुशहाल हो सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस अध्ययन में शादीशुदा जोड़ों के रिश्ते, घरेलू जिम्मेदारियों के बंटवारे और आपसी संतुष्टि जैसे पहलुओं का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि सिर्फ खाना बनाना ही अच्छे रिश्ते की पहचान नहीं है। बल्कि रिश्ते में बराबरी, सम्मान, साथ और एक-दूसरे की भावनाओं को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
घरेलू कामों का बोझ रिश्ते को कर सकता है प्रभावित
स्टडी में यह बात सामने आई कि अगर घर के सभी कामों की जिम्मेदारी केवल एक व्यक्ति पर आ जाए तो इससे तनाव बढ़ सकता है। खासतौर पर खाना बनाने जैसी रोजाना की जिम्मेदारी कई बार मानसिक दबाव का कारण बन सकती है। ऐसे में जब पति-पत्नी मिलकर काम बांटते हैं या बाहर से खाना मंगाने जैसे विकल्प अपनाते हैं, तो उनके बीच तनाव कम हो सकता है।
खाना बनाना नहीं, साथ निभाना है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी शादी की सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि कौन खाना बनाता है या कौन नहीं। एक मजबूत रिश्ते के लिए जरूरी है कि दोनों पार्टनर एक-दूसरे का सम्मान करें और जरूरत के समय साथ खड़े रहें।
कई आधुनिक कपल अब घरेलू कामों को मिलकर करने में विश्वास रखते हैं। कुछ लोग साथ में खाना बनाना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग समय बचाने के लिए बाहर से खाना मंगाते हैं। इन सभी स्थितियों में रिश्ते की मजबूती आपसी समझ और सहयोग से तय होती है।
हालांकि, किसी भी अध्ययन के निष्कर्ष सभी लोगों पर समान रूप से लागू नहीं किए जा सकते। हर शादी और हर परिवार की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि खाना बनाना या न बनाना सीधे तौर पर शादी की खुशी तय करता है। असल मायने रखता है पति-पत्नी के बीच प्यार, भरोसा और एक-दूसरे के प्रति सम्मान।

