भारत का वो गांव, जहां बच्चों से लेकर बूढ़ों तक बोलते हैं अंग्रेजी, घर-घर में हैं इंग्लिश के कोचिंग सेंटर!
भारत में अंग्रेजी भाषा को अक्सर बड़े शहरों, कॉन्वेंट स्कूलों और महंगे कोचिंग संस्थानों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन देश में एक ऐसा गांव भी है, जहां अंग्रेजी बोलना लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। खास बात यह है कि यहां केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि युवा और बुजुर्ग भी अंग्रेजी में बातचीत करते नजर आते हैं। गांव की पहचान ही अंग्रेजी सीखने और सिखाने के लिए बन गई है।
इस गांव की सबसे खास बात यहां मौजूद अंग्रेजी सीखने की संस्कृति है। गांव में जगह-जगह छोटे-छोटे कोचिंग सेंटर और क्लास चलती हैं। कई घरों में ही बच्चों और युवाओं को अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। सुबह से लेकर शाम तक अलग-अलग उम्र के लोग इन कक्षाओं में पहुंचते हैं। यही वजह है कि गांव में अंग्रेजी बोलने का माहौल तैयार हुआ है और लोगों को रोजाना अभ्यास करने का अवसर मिलता है।
बताया जाता है कि गांव के लोगों ने अंग्रेजी को रोजगार और बेहतर अवसरों से जोड़कर देखा। आसपास के क्षेत्रों में काम, पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में अंग्रेजी की जरूरत को देखते हुए लोगों ने इसे सीखने पर जोर देना शुरू किया। धीरे-धीरे यह प्रयास एक सामूहिक अभियान में बदल गया और गांव में अंग्रेजी सीखना सामान्य बात हो गई।
यहां बच्चों को छोटी उम्र से ही अंग्रेजी के शब्दों और वाक्यों का अभ्यास कराया जाता है। कई जगहों पर बातचीत के जरिए भाषा सिखाने पर जोर दिया जाता है, ताकि बच्चों का झिझक कम हो और वे अंग्रेजी बोलने में आत्मविश्वास महसूस करें। युवाओं के लिए भी अलग कक्षाएं संचालित की जाती हैं, जिनमें बोलने, लिखने और नौकरी से जुड़े संवाद का अभ्यास कराया जाता है।
इस गांव की एक और खासियत यह बताई जाती है कि अंग्रेजी सीखने की चाहत सिर्फ युवा पीढ़ी तक सीमित नहीं है। उम्रदराज लोग भी भाषा सीखने की कोशिश करते हैं। इससे गांव में पीढ़ियों के बीच अंग्रेजी बोलने और सीखने का एक अलग माहौल दिखाई देता है।
सोशल मीडिया पर भी समय-समय पर ऐसे गांवों की कहानियां सामने आती रहती हैं, जहां स्थानीय लोग किसी खास वजह से देशभर में चर्चा का विषय बन जाते हैं। अंग्रेजी को लेकर इस गांव की पहचान भी इसी तरह लोगों का ध्यान आकर्षित करती है।
हालांकि, गांव के बारे में सोशल मीडिया पर किए जाने वाले दावों और वास्तविक स्थिति में अंतर हो सकता है। इसलिए इसे भारत का 'सबसे ज्यादा अंग्रेजी बोलने वाला गांव' जैसे किसी आधिकारिक दर्जे के तौर पर देखने से पहले संबंधित स्रोतों की पुष्टि जरूरी है। फिर भी अंग्रेजी सीखने को लेकर ग्रामीण स्तर पर बना ऐसा माहौल यह जरूर दिखाता है कि भाषा सीखने की इच्छा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है।

