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रस्सी खींचकर स्टार्ट होता था टैम्पू… वो सफर, वो बचपन और वो पुराने दिन

रस्सी खींचकर स्टार्ट होता था टैम्पू… वो सफर, वो बचपन और वो पुराने दिन

आज अचानक नजरों के सामने एक पुराना टैम्पू आया, तो ऐसा लगा जैसे वक्त कुछ पल के लिए पीछे लौट गया हो। वही पुराना टैम्पू, वही अलग अंदाज और उसे देखकर याद आ गए बचपन के वो दिन, जब सफर का मतलब सिर्फ मंजिल तक पहुंचना नहीं, बल्कि रास्ते में मिलने वाली छोटी-छोटी खुशियां भी हुआ करती थीं।


एक समय था जब शहरों और कस्बों की सड़कों पर ऐसे पुराने टैम्पू खूब नजर आया करते थे। इनकी आवाज दूर से ही पहचान में आ जाती थी और कई बार इन्हें स्टार्ट करने का तरीका भी आज की गाड़ियों से बिल्कुल अलग होता था। रस्सी के सहारे टैम्पू स्टार्ट होते देखना बच्चों के लिए किसी छोटे से तमाशे से कम नहीं था।

टैम्पू में बैठते ही हर कोई अपनी पसंद की सीट पकड़ने की कोशिश करता था। कभी खिड़की के पास बैठने की जिद होती थी, तो कभी दोस्तों और परिवार के साथ बैठकर पूरे रास्ते हंसी-मजाक चलता रहता था। सफर छोटा हो या लंबा, उस दौर में ऐसी सवारी का अपना ही अलग मजा हुआ करता था।

आज सड़क पर आधुनिक गाड़ियां दौड़ रही हैं। टैम्पू की जगह ऑटो, ई-रिक्शा और दूसरी सुविधाजनक सवारियों ने ले ली है। सफर पहले से ज्यादा आरामदायक और तेज जरूर हो गया है, लेकिन पुराने दौर की वो मासूमियत और छोटी-छोटी खुशियां अब यादों में ही रह गई हैं।

समय बदल गया, सवारी बदल गई और जिंदगी भी बदल गई… लेकिन बचपन के वो सफर आज भी दिल में कहीं न कहीं वैसे ही मौजूद हैं।अगर आपने भी इस तरह के पुराने टैम्पू में बैठकर सफर किया है, तो यकीनन इस तस्वीर को देखकर आपके बचपन की कोई न कोई याद जरूर ताजा हुई होगी।

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