Samachar Nama
×

अमेजन के जंगलों का 'टार्जन', नाम है चीको, 38 साल अकेले रहकर 3 जैगुआर को मारा; खड़ा किया खुद का 'सुपरमार्केट'

अमेजन के जंगलों का 'टार्जन', नाम है चीको, 38 साल अकेले रहकर 3 जैगुआर को मारा; खड़ा किया खुद का 'सुपरमार्केट'

अमेजन का घना जंगल, चारों तरफ पेड़-पौधे, जंगली जानवर और दूर-दूर तक इंसानी बस्ती का नामोनिशान नहीं। ऐसी जगह पर जहां कुछ दिन रहना भी किसी चुनौती से कम नहीं, वहीं चीको नाम का एक शख्स करीब 38 साल से लगभग अकेले रह रहा है। आधुनिक दुनिया से दूर उसने जंगल के बीच अपनी ऐसी दुनिया बसा ली है, जहां न कोई सुपरमार्केट है और न ही सामान खरीदने के लिए बाजार। इसके बावजूद चीको ने जंगल में अपना ही 'सुपरमार्केट' तैयार कर लिया है।

हाल ही में Yes Theory की टीम ने अमेजन के बेहद दुर्गम इलाके में पहुंचकर चीको की जिंदगी को कैमरे में रिकॉर्ड किया। टीम के मुताबिक, वहां तक पहुंचने में लंबी यात्रा करनी पड़ी और नदी के रास्ते भी तय करने पड़े। जब टीम चीको के ठिकाने पर पहुंची तो उन्हें जंगल के बीच ऐसा इलाका मिला, जिसे देखकर पहली नजर में लगा कि यह पूरी तरह प्राकृतिक जंगल है। लेकिन चीको ने बताया कि यहां मौजूद बड़ी संख्या में पेड़ उसने खुद लगाए हैं।

चीको ने करीब 38 साल पहले लगभग 1,500 ब्राजील नट के पेड़ लगाए थे। इन पेड़ों को फल देने में लंबा वक्त लगा और रिपोर्ट के मुताबिक इस साल उसे पहली बार इनसे फसल मिली। इसके अलावा उसके आसपास आम, केला और अनानास जैसे फलदार पेड़ भी हैं। इस तरह उसने अपने घर के आसपास खाने-पीने की ऐसी व्यवस्था तैयार कर ली है, जिसे वहां पहुंचे लोगों ने मजाकिया अंदाज में उसका 'सुपरमार्केट' बताया।

चीको की जिंदगी सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है। वह बारिश का पानी इकट्ठा करके अपनी पानी की जरूरत पूरी करता है और मांस के लिए शिकार भी करता है। Yes Theory की टीम जब उससे मिली तो उसने उनके लिए जंगली सूअर का मांस भी तैयार किया था। बिजली और रेफ्रिजरेटर जैसी सुविधाएं न होने के कारण वहां खाने को सुरक्षित रखना भी एक चुनौती है।

सबसे हैरान करने वाली बात जंगल के खतरनाक जानवरों से जुड़े चीको के अनुभव हैं। रिपोर्टों के अनुसार चीको ने बताया कि अमेजन में रहने के दौरान उसका तीन बार जगुआर से सामना हुआ और उसने तीन जगुआर को गोली मारकर अपनी जान बचाई। एक घटना में उसके हाथ में जगुआर के दांत तक धंस गए थे। हालांकि, उसके जीवन में खतरा केवल जंगली जानवरों से ही नहीं है। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि ब्राजील नट के भारी फल ऊंचाई से गिरने पर गंभीर चोट पहुंचा सकते हैं।

चीको की सोच भी आधुनिक जिंदगी से काफी अलग है। उसके लिए पैसे की उपयोगिता उस जगह बेहद सीमित है, क्योंकि वहां दुकानें या बाजार नहीं हैं। जरूरत की चीजें उसे जंगल से ही जुटानी पड़ती हैं। फल उगाना, शिकार करना, बारिश का पानी जमा करना और मौसम के हिसाब से जीवन जीना उसकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है।

करीब चार दशक तक जंगल में रहने के बाद चीको ने अपने आसपास के वातावरण को ही अपनी जरूरतों के मुताबिक ढाल लिया है। उसके लगाए पेड़ आज उसके लिए भोजन का स्रोत हैं और उसकी पूरी जिंदगी इस बात की मिसाल बन गई है कि बेहद कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों में इंसान किस तरह आत्मनिर्भर जीवन जी सकता है। इसी अनोखी कहानी की वजह से सोशल मीडिया पर उसे अमेजन का 'टार्जन' कहा जा रहा है।

Share this story

Tags