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सोशल मीडिया पर वायरल “बकरी से नवजात को दूध पिलाने” वाली कहानी, बनी नवजात शिशु की “पालक मां”

सोशल मीडिया पर वायरल “बकरी से नवजात को दूध पिलाने” वाली कहानी, बनी नवजात शिशु की “पालक मां”

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक पुरानी ग्रामीण कहानी तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में जब नवजात शिशु की मां प्रसव के दौरान या कुपोषण की वजह से उसे दूध नहीं पिला पाती थी, तो परिवार उसे बकरी का दूध पिलाकर पालते थे।

कहानी के अनुसार, उस समय चिकित्सा सुविधाओं की कमी और संसाधनों के अभाव में कई ग्रामीण परिवार नवजात बच्चों के पालन-पोषण के लिए घरेलू पशुओं पर निर्भर रहते थे। इसी संदर्भ में यह भी दावा किया जाता है कि कभी-कभी बकरी को बच्चे के पास रखकर दूध पिलाया जाता था, जिससे लोग उसे “पालक मां” के रूप में देखने लगते थे।

rural history के अनुसार, पुराने समय में ग्रामीण समाज में पशुपालन जीवन का अहम हिस्सा था और दूध के लिए गाय-बकरी जैसे पशुओं पर निर्भरता काफी अधिक थी। ऐसे में बकरी का दूध कई घरों में सामान्य रूप से उपयोग किया जाता था, खासकर उन परिस्थितियों में जहां शिशु के लिए अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं होते थे।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि “बकरी द्वारा सीधे बच्चे को दूध पिलाना” जैसी बात वैज्ञानिक रूप से सामान्य या प्राकृतिक व्यवहार नहीं माना जाता। यह संभव है कि कुछ दुर्लभ और असामान्य परिस्थितियों में ऐसा अनुभव लोगों ने देखा या बताया हो, लेकिन इसे एक सामान्य सामाजिक प्रथा के रूप में नहीं देखा जाता।

medical history के जानकारों का कहना है कि उस दौर में नवजात शिशुओं के पोषण के लिए सबसे आम विकल्प मां का दूध, स्तनपान कराने वाली अन्य महिलाएं (wet nurses) या पशुओं का दूध (जैसे गाय और बकरी) होता था। लेकिन शारीरिक रूप से पशुओं से सीधे इस तरह का संपर्क बहुत सीमित और असामान्य स्थिति मानी जाती है।

सोशल मीडिया पर यह कहानी भावनात्मक रूप से लोगों को आकर्षित कर रही है, क्योंकि यह पुराने समय की कठिन परिस्थितियों और मानवीय संघर्ष को दर्शाती है। हालांकि इसे ऐतिहासिक तथ्य की बजाय एक लोक-कथा या अनुभव आधारित कथन के रूप में देखना ज्यादा उचित माना जा रहा है।

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