Samachar Nama
×

योद्धाओं से कम नहीं हैं इस जनजाति के लोग, पीते हैं जिंदा जानवरों का खून

l

हर देश की अपनी सांस्कृतिक पहचान होती है, जो वहां की जातियों, जनजातियों और समुदायों के जीवन के तौर-तरीकों में झलकती है। अफ्रीकी महाद्वीप की बात करें, तो यहां की मसाई जनजाति (Maasai Tribe) एक ऐसी अनूठी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती है, जो आज भी आधुनिक संसाधनों और तकनीकों से दूर रहकर अपने सदियों पुराने परंपरागत जीवन को पूरी आस्था और सादगी के साथ जी रही है।

कहां बसती है मसाई जनजाति?

मसाई जनजाति मुख्य रूप से पूर्वी अफ्रीका के दो देशों - केन्या और तंजानिया के रेगिस्तानी और घास के मैदानों वाले क्षेत्रों में निवास करती है। ये लोग मसाई मारा, सेरेनगेटी और अंबोसेली जैसे प्रसिद्ध नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ रिजर्व के आसपास रहते हैं। अनुमान है कि इनकी कुल आबादी लगभग 10 लाख के आसपास है।

मसाई जनजाति की पहचान और संस्कृति

मसाई जनजाति की पहचान उनके पहनावे, रहन-सहन और साहसी जीवनशैली से होती है।

  • ये लोग लाल रंग के पारंपरिक वस्त्र पहनते हैं जिसे "शुका" कहा जाता है।

  • पुरुष आमतौर पर भाले और छड़ी के साथ चलते हैं, और उनकी चाल-ढाल में आत्मविश्वास झलकता है।

  • मसाई पुरुषों को योद्धा के रूप में जाना जाता है, जिनका एक समय में शेर से मुकाबला करना "मर्द बनने की परीक्षा" माना जाता था।

इनकी भाषा "मा" है, लेकिन कई लोग अब स्वाहिली और अंग्रेज़ी भी बोल सकते हैं।

सामाजिक व्यवस्था और नियम-कायदे

मसाई समाज पूरी तरह से अपने मौखिक परंपराओं और नियमों पर आधारित है।

  • यहां बुजुर्ग पुरुष समुदाय के नेता होते हैं, और सभी निर्णय वही लेते हैं।

  • सरकारी कानूनों का पालन ये तब तक नहीं करते जब तक वो उनके परंपरागत नियमों से मेल न खाएं।

इनकी संपत्ति का आंकलन जानवरों और बच्चों की संख्या से होता है, न कि पैसों या जमीन से।

जानवरों से गहरा संबंध

मसाई जनजाति का जीवन पूरी तरह से पशुपालन पर आधारित है।

  • ये लोग घुमंतू होते हैं और अपने जानवरों (गाय, बकरी, भेड़) के लिए चरागाह की तलाश में एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते हैं।

  • जानवर इनके लिए भोजन, व्यापार, वस्त्र और आवास का माध्यम हैं।

मसाई भोजन में मुख्य रूप से दूध, मांस और खून शामिल होता है।

  • हां, आपने सही पढ़ा! ये लोग खास मौकों पर जानवरों का खून भी पीते हैं।

खून पीने की परंपरा

मसाई जनजाति की खून पीने की परंपरा बेहद अनोखी और चौंकाने वाली है।

  • किसी की डिलीवरी, खतना या बीमारी के समय यह खून पीने की परंपरा निभाते हैं।

  • इनका मानना है कि खून पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है और शरीर मजबूत बनता है।

  • शराब के नशे से उबरने या हैंगओवर दूर करने के लिए भी खून पिया जाता है।

खून पीने के दो तरीके होते हैं:

  1. जानवर की गर्दन में हल्का छेद कर खून निकालकर पीना।

  2. सीधे जानवर की गर्दन से खून चूसना।

यह खून पीने की प्रक्रिया जानवर को मारे बिना की जाती है और बाद में जानवर को आराम दिया जाता है।

जीवनशैली और आवास

मसाई जनजाति के लोग जहां भी जाते हैं, वहां झोपड़ियां बनाते हैं जिन्हें “एनकाजी” कहा जाता है।

  • ये झोपड़ियां मिट्टी, गोबर, लकड़ी और भूसे से बनाई जाती हैं।

  • हर बस्ती के चारों ओर फेंसिंग होती है, ताकि जंगली जानवरों से सुरक्षा बनी रहे।

ये लोग जानवरों की खाल का प्रयोग बिस्तर के रूप में करते हैं।

परंपराओं पर मंडराता खतरा

विकास और शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव ने मसाई संस्कृति को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

  • कई युवा अब पढ़ाई और नौकरी की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

  • शेर का शिकार, जो कभी मर्दानगी का प्रतीक था, अब लगभग बंद हो चुका है क्योंकि यह कानूनन अपराध है।

  • सरकारें भी इन्हें स्थायी आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की कोशिश कर रही हैं।

निष्कर्ष

मसाई जनजाति आधुनिकता की दौड़ में पीछे जरूर है, लेकिन उनकी सांस्कृतिक विरासत, जीवनशैली और प्रकृति से गहरा जुड़ाव उन्हें दुनिया की सबसे अनूठी जनजातियों में शामिल करता है। ये लोग सिखाते हैं कि सादगी, आत्मनिर्भरता और परंपरा के साथ भी जीवन जिया जा सकता है।

हो सकता है आने वाले समय में मसाई जनजाति के कुछ रीति-रिवाज इतिहास बन जाएं, लेकिन आज भी ये जनजाति हमें प्राचीन और प्राकृतिक जीवन का जीवंत उदाहरण देती है।

Share this story

Tags