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भानगढ़ और नाहरगढ़ किले से भी ज्यादा खौफनाक है राजस्थान के इस किले का इतिहास, हर रात सुनाई देती है हजारो वीरांगनाओं की चीखें 

भानगढ़ और नाहरगढ़ किले से भी ज्यादा खौफनाक है राजस्थान के इस किले का इतिहास, हर रात सुनाई देती है हजारो वीरांगनाओं की चीखें 

 राजस्थान का चित्तौड़गढ़ किला, जो अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, अब अपनी डरावनी और रहस्यमयी कथाओं के लिए भी जाना जाता है। इस किले के बारे में कहा जाता है कि हर रात वहां वीरांगनाओं की चीखें सुनाई देती हैं, जिन्होंने किले की रक्षा करते हुए आत्महत्या की थी। इन वीरांगनाओं का बलिदान इस किले के इतिहास में दर्ज है, और इनकी आत्माएँ आज भी इस किले में भटकती हैं, जो इसे राजस्थान के सबसे खौफनाक किलों में से एक बनाता है।

चित्तौड़गढ़ किले का इतिहास
चित्तौड़गढ़ किला राजस्थान के चित्तौड़ शहर में स्थित है और यह किला भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। इस किले की दीवारें और महल कई सदियों पुरानी हैं, और इनकी संरचना में राजपूतों की वीरता और उनकी गौरवमयी ऐतिहासिक घटनाएँ छिपी हुई हैं। किले का निर्माण 7वीं शताब्दी में हुआ था और इसे राजस्थान के राजपूत शासकों ने अपनी शक्ति और गौरव को बढ़ाने के लिए बनवाया था। किले में 84 चौकियां, कई मंदिर, महल और दरवाजे हैं, जो इसकी प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।

चित्तौड़गढ़ किले के इतिहास में वीरांगनाओं का बलिदान
चित्तौड़गढ़ किला इतिहास की उन गाथाओं से भरा हुआ है, जहां सैकड़ों वीरांगनाओं ने अपनी जान की आहुति दी थी। विशेष रूप से, 1567 में जब अकबर ने इस किले को घेर लिया था, तो रानी पद्मिनी और उनके साथियों ने आत्मदाह (जौहर) कर लिया था। रानी पद्मिनी ने अपनी सौंदर्य और वीरता के कारण इतिहास में विशेष स्थान प्राप्त किया था, लेकिन उनके साथ सैकड़ों राजपूत महिलाएं भी किले में जीवित नहीं रह पाई और उन्होंने अपने आत्म-सम्मान और अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जान दे दी।इस जौहर के दौरान किले में हुई सैकड़ों महिलाओं की मृत्यु ने किले को एक खौफनाक स्थल बना दिया। कहा जाता है कि इस आत्मदाह के बाद किले में उनकी आत्माएँ फंसी हुई हैं, और आज भी रात के समय उनकी चीखें सुनाई देती हैं।

रहस्यमयी घटनाएँ और चीखें
चित्तौड़गढ़ किले के बारे में कई डरावनी कहानियाँ प्रचलित हैं। कई पर्यटकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय किले में वीरांगनाओं की चीखें और गूंज सुनाई देती है। यह आवाजें मानो एक दर्दनाक और वीरता से भरे इतिहास का हिस्सा हों, जो इस किले की दीवारों में समाई हुई हैं। पर्यटकों ने दावा किया है कि किले में घूमते समय उन्हें ऐसी आवाजें सुनाई दी हैं, जो सामान्य नहीं होतीं।कुछ लोग यह भी मानते हैं कि रात के समय किले के आंतरिक भागों में हलचल होती है और किलों के प्राचीन दरवाजों के पास अजीब सी रोशनी दिखाई देती है। किले के आंतरिक हिस्से में स्थित कुओं और जलाशयों में भी अजीब आवाजें आती हैं, जो और भी रहस्यमयी मानी जाती हैं। यह घटनाएँ उस गहरे और डरावने इतिहास से जुड़ी हुई हैं, जो किले के अंदर समाया हुआ है।

भानगढ़ और नाहरगढ़ से ज्यादा खौफनाक क्यों?
जब राजस्थान के अन्य किलों जैसे भानगढ़ और नाहरगढ़ की बात की जाती है, तो इन दोनों किलों के बारे में भी कई रहस्यमयी और डरावनी कथाएँ प्रचलित हैं। भानगढ़ किला तो विशेष रूप से अपनी भूतिया घटनाओं के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन चित्तौड़गढ़ किला अपने ऐतिहासिक घटनाक्रमों और वीरांगनाओं के बलिदान के कारण अधिक खौफनाक और डरावना माना जाता है।भानगढ़ और नाहरगढ़ में जिन भूत-प्रेतों की कथाएँ प्रचलित हैं, वे किसी निश्चित व्यक्ति या घटना से जुड़ी नहीं हैं। वहीं, चित्तौड़गढ़ किला उस इतिहास से जुड़ा हुआ है, जहां असंख्य वीरांगनाओं ने अपनी जान दी थी, और उनका दर्द और बलिदान आज भी उस किले में महसूस किया जाता है। यह किला न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इस किले के रहस्यों और घटनाओं ने इसे और भी खौफनाक बना दिया है।

चित्तौड़गढ़ किला: ऐतिहासिक और डरावनी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण
चित्तौड़गढ़ किला एक ओर जहां राजपूतों की वीरता और उनके संघर्ष का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह किला एक रहस्यमयी स्थल भी बन चुका है। यहाँ पर हुई वीरांगनाओं की जौहर की घटना ने किले को एक भूतिया स्थल बना दिया है। कहा जाता है कि किले की दीवारों और गलियारों में उन वीरांगनाओं की आत्माएँ भटकती हैं, जिनकी मृत्यु जौहर के दौरान हुई थी।चित्तौड़गढ़ किला आज भी पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है। इतिहास प्रेमियों के लिए यह किला एक ऐतिहासिक धरोहर है, जबकि डरावनी कहानियों के शौकिनों के लिए यह एक रहस्यमयी स्थल है। इस किले में घूमने के दौरान न केवल आप ऐतिहासिक महत्व को महसूस करेंगे, बल्कि यह किला आपको उस दुख और बलिदान की याद भी दिलाएगा जो यहाँ की वीरांगनाओं ने अपने देश और सम्मान के लिए दिया था।

निष्कर्ष
चित्तौड़गढ़ किला अपनी ऐतिहासिक घटनाओं और वीरांगनाओं के बलिदान के कारण राजस्थान के सबसे खौफनाक किलों में से एक बन चुका है। यहां की हर रात उन वीरांगनाओं की चीखों से गूंजती है, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी थी। यह किला न केवल इतिहास का एक जीवित उदाहरण है, बल्कि यह उन भूतिया और रहस्यमयी घटनाओं का भी गवाह है, जो आज भी यहां के वातावरण में महसूस की जाती हैं। अगर आप इतिहास और रहस्य के शौकिन हैं, तो चित्तौड़गढ़ किला एक ऐसी जगह है जिसे आपको जरूर देखना चाहिए।

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