लगभग 570 साल पुरानी गूटेनबर्ग बाइबिल को दुनिया की सबसे दुर्लभ और कीमती पुस्तकों में गिना जाता है। इस ऐतिहासिक कृति ने न केवल धार्मिक साहित्य के इतिहास में बल्कि पूरी दुनिया में छपाई (प्रिंटिंग) के युग में क्रांतिकारी बदलाव लाया।
इस पुस्तक को योहानेस गूटेनबर्ग ने 15वीं सदी के मध्य में तैयार किया था, जिन्हें आधुनिक प्रिंटिंग प्रेस का जनक माना जाता है। गूटेनबर्ग बाइबिल को मानव इतिहास की पहली प्रमुख मुद्रित पुस्तकों में से एक माना जाता है, जिसने ज्ञान के प्रसार को पहले से कहीं अधिक आसान और तेज बना दिया।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बाइबिल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और तकनीकी अहमियत के कारण इसकी कीमत आज के समय में बेहद ऊंची आंकी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी अनुमानित कीमत करीब 1,250 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जिससे यह दुनिया की सबसे महंगी किताबों में शामिल हो जाती है।
इतिहासकारों का कहना है कि गूटेनबर्ग की इस खोज ने शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में एक नई क्रांति शुरू की। इससे पहले किताबें हाथ से लिखी जाती थीं, जिसमें बहुत समय और मेहनत लगती थी। लेकिन प्रिंटिंग प्रेस के आने के बाद किताबों का उत्पादन तेज हुआ और ज्ञान आम लोगों तक पहुंचने लगा।
आज भी गूटेनबर्ग बाइबिल के कुछ ही मूल संस्करण दुनिया के चुनिंदा संग्रहालयों और पुस्तकालयों में सुरक्षित रखे गए हैं। इन्हें अत्यंत मूल्यवान धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाता है।

