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वो दौर, जब कार से बाहर लगाई जाती थी बच्चों की सीट, खुली हवा में लेते थे नजारों का मजा

वो दौर, जब कार से बाहर लगाई जाती थी बच्चों की सीट, खुली हवा में लेते थे नजारों का मजा!

आज के दौर में बच्चों के साथ कार में सफर करते समय सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होती है। सीट बेल्ट, चाइल्ड सीट, एयरबैग और कई आधुनिक सेफ्टी फीचर्स अब कारों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन कुछ दशक पहले कार से सफर करने का अंदाज बिल्कुल अलग हुआ करता था। सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें और वीडियो अक्सर उस दौर की यादें ताजा कर देते हैं, जब बच्चों को कार की पिछली सीट पर बैठाने के बजाय कभी-कभी वाहन के बाहर लगे अतिरिक्त हिस्से या खुली जगह में बैठा दिया जाता था।

पुराने समय की ऐसी तस्वीरें देखकर आज की पीढ़ी को यकीन करना मुश्किल हो सकता है। कई पुराने वाहनों में यात्रियों के लिए आज जैसी सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती थी। कारों में आधुनिक सीट बेल्ट, एयरबैग और बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा सीट आम नहीं थीं। परिवार के लोग अक्सर अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से बच्चों को कार के अलग-अलग हिस्सों में बैठाकर सफर कर लेते थे।

वायरल हो रही पुरानी तस्वीरों में एक ऐसा ही दृश्य देखने को मिलता है। कार के पीछे या बाहर एक अतिरिक्त सीट जैसी संरचना दिखाई देती है, जिसमें बच्चे बैठे हुए नजर आते हैं। बच्चे खुले वातावरण में बैठकर सफर का आनंद लेते थे। उनके लिए यह सफर किसी रोमांच से कम नहीं रहा होगा। कार के अंदर बैठने के बजाय बाहर से सड़क और आसपास के नजारों को देखने का अनुभव उन्हें खास लगता था।

उस समय कार से लंबी दूरी की यात्रा भी आज की तुलना में अलग अनुभव हुआ करती थी। सड़कें अपेक्षाकृत कम व्यस्त थीं और वाहनों में तकनीकी सुविधाएं भी सीमित थीं। कई परिवार यात्रा के दौरान रास्ते में रुकते, खाना खाते और आसपास के प्राकृतिक नजारों का आनंद लेते थे। बच्चों के लिए पूरी यात्रा ही एक रोमांचक अनुभव बन जाती थी।

लेकिन आज जब इन तस्वीरों को सुरक्षा के नजरिए से देखा जाता है तो यह तरीका काफी जोखिम भरा नजर आता है। चलते वाहन में किसी व्यक्ति का सुरक्षित केबिन के बाहर बैठना दुर्घटना की स्थिति में गंभीर चोट का कारण बन सकता है। अचानक ब्रेक लगने, वाहन के टकराने या सड़क पर किसी अप्रत्याशित स्थिति में बाहर बैठे व्यक्ति के वाहन से गिरने का खतरा रहता है।

यही कारण है कि समय के साथ कारों की सुरक्षा तकनीक में बड़ा बदलाव आया। आज बच्चों के लिए उम्र और आकार के अनुसार उपयुक्त चाइल्ड रेस्ट्रेंट सिस्टम और सीट बेल्ट के इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है। कार कंपनियां भी यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एयरबैग, इलेक्ट्रॉनिक सेफ्टी सिस्टम और मजबूत बॉडी स्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं देती हैं।

पुरानी तस्वीरें हालांकि हमें यह जरूर दिखाती हैं कि लोगों की यात्रा संस्कृति कितनी बदल चुकी है। जिस चीज को कभी सामान्य या रोमांचक माना जाता था, वही आज सुरक्षा के लिहाज से अस्वीकार्य लग सकती है। तकनीक के विकास के साथ सिर्फ कारें ही नहीं बदलीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा को लेकर सोच भी काफी बदल गई है।

सोशल मीडिया पर ऐसी तस्वीरें इसलिए वायरल होती हैं क्योंकि इनमें लोगों को अपना बचपन और पुराना दौर याद आता है। कई यूजर्स इन तस्वीरों को देखकर अपने पुराने सफर के किस्से साझा करते हैं। किसी को परिवार के साथ की गई यात्राएं याद आती हैं तो कोई पुराने वाहनों के डिजाइन को देखकर हैरान होता है।

हालांकि, पुराने दौर की इन यादों को देखकर nostalgia महसूस करना अलग बात है और उस समय की जोखिम भरी आदतों को आज दोहराना अलग। वर्तमान समय में बच्चों को वाहन में सुरक्षित तरीके से बैठाना और सीट बेल्ट या उपयुक्त चाइल्ड सीट का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है।

यानी कभी कार के बाहर बैठकर खुली हवा में सफर करना बच्चों के लिए रोमांचक अनुभव रहा होगा, लेकिन आज के दौर में यह सुरक्षित यात्रा का तरीका नहीं माना जा सकता। पुरानी तस्वीरें बीते जमाने की यादें जरूर ताजा करती हैं, लेकिन साथ ही यह भी दिखाती हैं कि सड़क सुरक्षा के मामले में दुनिया कितनी आगे बढ़ चुकी है।

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