Samachar Nama
×

तेलंगाना की ‘बोड्डू राय’ परंपरा: गाँवों में आज भी न्याय और आस्था का प्रतीक

तेलंगाना की ‘बोड्डू राय’ परंपरा: गाँवों में आज भी न्याय और आस्था का प्रतीक

दक्षिण भारत के तेलंगाना के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी प्राचीन परंपराएं और लोक-आस्थाएं जीवित हैं। इन्हीं में से एक है ‘बोड्डू राय’ या नाभि-पत्थर की परंपरा, जिसे ग्रामीण समाज में न्याय, सत्य और सीमाओं का प्रतीक माना जाता है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ‘बोड्डू राय’ एक गोल पत्थर होता है, जिसे गाँव के केंद्र में स्थापित किया जाता है। इसे केवल एक पत्थर नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और नैतिकता का रक्षक माना जाता है। कई गाँवों में आज भी इसे अत्यंत सम्मान के साथ देखा जाता है।

ग्रामीणों के अनुसार, पुराने समय में जब आपसी विवाद या जमीन-जायदाद से जुड़े झगड़े होते थे, तो लोग इसी स्थान पर इकट्ठा होकर चौपाल लगाते थे। मान्यता थी कि इस पवित्र स्थल पर कोई झूठ बोलने की हिम्मत नहीं करता और विवादों का समाधान आपसी सहमति से निकल आता है।

इसके अलावा, बताया जाता है कि कुछ पारंपरिक त्योहारों जैसे बतुकम्मा और बोनालु की शुरुआती पूजा भी कई जगहों पर इसी स्थान से जुड़ी होती है। इससे यह स्थल केवल न्याय का ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक एकता और सामूहिक आस्था का केंद्र भी बन जाता है।

हालांकि आधुनिक समय में कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह संवैधानिक ढांचे पर आधारित है, फिर भी ऐसे लोक-स्थल ग्रामीण समाज में सामाजिक एकता और परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आज भी तेलंगाना के कई हिस्सों में यह परंपरा लोगों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बनी हुई है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही है।

Share this story

Tags