छोटी-सी दुकान, बड़ी मेहनत की कहानी: फतेहपुर के रमेश कुमार ने बताया कि काम छोटा नहीं होता
फतेहपुर: सफलता हमेशा बड़े कार्यालय, महंगी दुकान या ऊंची नौकरी से ही मिले, यह जरूरी नहीं है। अगर मेहनत और लगन हो तो छोटी-सी दुकान भी किसी के सपनों को उड़ान दे सकती है। फतेहपुर के रमेश कुमार की कहानी इसी सोच को सच साबित करती नजर आती है।
रमेश कुमार सड़क किनारे एक छोटी-सी दुकान पर लोगों की हजामत बनाने का काम करते हैं। दुकान भले ही छोटी है, लेकिन उनके काम की रफ्तार और ग्राहकों की संख्या देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह अपने काम में कितने माहिर हैं।
बताया गया कि एक व्यक्ति बस का इंतजार करते हुए करीब एक घंटे तक उनकी दुकान के पास रुका। इस दौरान उसने देखा कि रमेश की कुर्सी लगभग लगातार ग्राहकों से भरी रही। एक ग्राहक के जाने के तुरंत बाद दूसरा ग्राहक अपनी बारी का इंतजार करता दिखाई दिया।
सबसे खास बात यह रही कि लगातार काम करने के बावजूद रमेश के चेहरे पर थकान के कोई खास निशान नजर नहीं आए। वह पूरे उत्साह और लगन के साथ अपने काम में जुटे रहे।
बताया जाता है कि एक हजामत के लिए वह करीब 50 रुपये लेते हैं और एक घंटे में लगभग चार ग्राहकों की हजामत बना लेते हैं। हालांकि उनकी वास्तविक दैनिक कमाई का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसी आधार पर की गई गणना के अनुसार उनकी रोजाना की आमदनी अच्छी-खासी हो सकती है।
इनसे मिलिए ये हैं रमेश कुमार
— Deepak Arora (@anjumsamachar) September 3, 2026
फतेहपुर में इनकी ये छोटी सी दुकान है लेकिन हाथ का हुनर ऐसा है कि देर रात तक यहां एक तरफ सफर करने वालों की जितनी टिकिट नहीं कटती
उससे ज्यादा ये लोगों के बाल काट देते हैं। मैंने यहां अपनी बस के इंतजार में 1 घंटा बिताया और देखा कि इनकी कुर्सी खाली… pic.twitter.com/YmrA2DiE6G
रमेश की कहानी सिर्फ कमाई की नहीं, बल्कि मेहनत और आत्मनिर्भरता की भी है। उनकी छोटी-सी दुकान यह संदेश देती है कि किसी भी काम को छोटा या बड़ा समझने के बजाय उसे ईमानदारी और पूरी मेहनत के साथ करना चाहिए।
क्योंकि सफलता दुकान के आकार से नहीं, मेहनत करने वाले इंसान के हौसले से तय होती है। काम कोई भी हो, अगर उसमें लगन और निरंतर मेहनत हो तो सफलता एक दिन जरूर कदम चूमती है।

