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दिखने में छोटी और रंगीन मछली, इंसानों की बीमारियों पर रिसर्च में आ रही काम
 

दिखने में छोटी और रंगीन मछली, इंसानों की बीमारियों पर रिसर्च में आ रही काम

दिखने में छोटी और बेहद रंगीन नजर आने वाली एक मछली वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यह मछली आकार में भले ही छोटी हो, लेकिन इंसानों से जुड़ी कई जैविक प्रक्रियाओं और बीमारियों को समझने के लिए वैज्ञानिक इसका इस्तेमाल रिसर्च में कर रहे हैं। दरअसल, यह मछली जेब्राफिश के नाम से जानी जाती है और पिछले कई वर्षों से वैज्ञानिक अनुसंधान का महत्वपूर्ण मॉडल बनी हुई है।

जेब्राफिश मीठे पानी में पाई जाने वाली छोटी मछली है। इसके शरीर पर दिखाई देने वाली धारियां इसे आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं। इसका वैज्ञानिक नाम Danio rerio है। वैज्ञानिकों के लिए इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका तेजी से विकसित होना और इसके भ्रूण का पारदर्शी होना है। पारदर्शी भ्रूण की वजह से शोधकर्ता शरीर के अंदर होने वाली कई विकास प्रक्रियाओं को सीधे देख और समझ सकते हैं।

वैज्ञानिक इस मछली का इस्तेमाल मानव शरीर में होने वाली विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं के अध्ययन के लिए करते हैं। जेब्राफिश और इंसानों के बीच कई महत्वपूर्ण जीन और जैविक प्रक्रियाओं में समानताएं पाई जाती हैं। इसी वजह से वैज्ञानिक कुछ बीमारियों और उनके संभावित उपचार को समझने के लिए इसे मॉडल जीव के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

इस मछली की मदद से विकास, जेनेटिक्स, कोशिकाओं के व्यवहार और कई अन्य जैविक प्रक्रियाओं पर शोध किया जाता है। इसके जरिए वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करते हैं कि किसी बीमारी के दौरान शरीर में किस तरह के बदलाव होते हैं। दवाओं और उपचार से जुड़े शुरुआती शोध में भी जेब्राफिश उपयोगी साबित हो सकती है।

जेब्राफिश की एक और खासियत यह है कि यह तेजी से प्रजनन करती है और कम समय में बड़ी संख्या में भ्रूण उपलब्ध करा सकती है। इससे वैज्ञानिकों को एक ही अध्ययन में बड़ी संख्या में नमूनों का निरीक्षण करने का अवसर मिलता है। इसका छोटा आकार और प्रयोगशाला में आसानी से पालन किया जा सकना भी रिसर्च के लिहाज से फायदेमंद माना जाता है।

वैज्ञानिक तंत्रिका तंत्र, हृदय के विकास, रक्त निर्माण और अन्य जैविक प्रक्रियाओं से जुड़े अध्ययन में भी जेब्राफिश का इस्तेमाल करते हैं। इसके जरिए वैज्ञानिक मानव स्वास्थ्य से संबंधित कई बुनियादी सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं।

हालांकि जेब्राफिश इंसान नहीं है और इस पर मिले हर वैज्ञानिक निष्कर्ष को सीधे मानव शरीर पर लागू नहीं किया जा सकता। किसी बीमारी के इलाज या दवा को इंसानों के लिए सुरक्षित और प्रभावी मानने से पहले कई स्तरों पर वैज्ञानिक और क्लीनिकल परीक्षण जरूरी होते हैं।

दिखने में साधारण और छोटी सी यह रंगीन मछली इसलिए वैज्ञानिकों के लिए बेहद खास है। इसकी मदद से शरीर के अंदर होने वाली जटिल प्रक्रियाओं को समझने में शोधकर्ताओं को महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। यही वजह है कि जेब्राफिश आज आधुनिक जैव चिकित्सा अनुसंधान में एक महत्वपूर्ण मॉडल जीव के रूप में अपनी जगह बना चुकी है।

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