पहाड़ों के ‘आंसू’ कहलाने वाली शिलाजीत की कीमत हजारों रुपये किलो, जानिए क्यों है इतनी खास
भारत के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में प्रकृति के कई ऐसे रहस्य छिपे हैं, जो लोगों को हैरान कर देते हैं। इन्हीं में से एक है शिलाजीत, जिसे कई जगहों पर प्यार से "पहाड़ों के आंसू" भी कहा जाता है। काले रंग का यह चिपचिपा पदार्थ चट्टानों से निकलता है और सदियों से आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है।
शिलाजीत अपनी दुर्लभता और औषधीय गुणों के कारण काफी महंगा माना जाता है। बाजार में इसकी कीमत गुणवत्ता और शुद्धता के आधार पर हजारों रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
कैसे बनता है पहाड़ों का यह ‘आंसू’?
शिलाजीत का निर्माण प्राकृतिक प्रक्रिया से हजारों वर्षों में होता है। पहाड़ों में मौजूद पौधों और जैविक पदार्थों के धीरे-धीरे विघटन से एक खनिजयुक्त पदार्थ तैयार होता है, जो गर्मी बढ़ने पर चट्टानों की दरारों से बाहर निकलने लगता है।
जब यह काला और गाढ़ा पदार्थ पहाड़ों की सतह पर बहता दिखाई देता है, तो स्थानीय लोग इसे पहाड़ों का पसीना या आंसू कहने लगते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक प्राकृतिक खनिज पदार्थ है।
क्यों महंगी होती है शिलाजीत?
शिलाजीत आसानी से उपलब्ध नहीं होता। इसे ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों से निकाला जाता है। इसके अलावा असली और शुद्ध शिलाजीत की पहचान करना भी मुश्किल होता है।
बाजार में इसकी मांग ज्यादा होने और सीमित उपलब्धता के कारण इसकी कीमत काफी अधिक हो जाती है। हालांकि, कीमत इसकी गुणवत्ता, शुद्धता और स्रोत पर निर्भर करती है।
आयुर्वेद में बताया गया है महत्व
आयुर्वेद में शिलाजीत को लंबे समय से एक महत्वपूर्ण औषधीय पदार्थ माना गया है। इसमें कई खनिज और जैविक तत्व पाए जाते हैं। पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल शरीर की ऊर्जा, ताकत और कमजोरी से जुड़ी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है।
कई लोग इसे पुरुषों की शारीरिक क्षमता से जुड़ी समस्याओं के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी औषधि का सेवन करने से पहले उसकी गुणवत्ता और चिकित्सकीय सलाह का ध्यान रखना जरूरी है।
नकली शिलाजीत से रहें सावधान
शिलाजीत की बढ़ती मांग के कारण बाजार में नकली उत्पाद भी मिल सकते हैं। कई बार इनमें मिलावट की जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शिलाजीत खरीदते समय उसकी शुद्धता, प्रमाण और गुणवत्ता की जांच जरूर करनी चाहिए।
प्रकृति का अनोखा खजाना
शिलाजीत को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा रहती है। पहाड़ों की चट्टानों से निकलने वाला यह पदार्थ न सिर्फ वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय है, बल्कि आयुर्वेद में भी इसका विशेष स्थान माना जाता है।
यही वजह है कि हजारों सालों से चला आ रहा यह प्राकृतिक पदार्थ आज भी लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय और बेशकीमती बना हुआ है।

