Samachar Nama
×

ऐसे जिंदगी जीते हैं सेंटीनल द्वीप के लोग, जिन्होंने तीर-कमान से कर दी अमेरिकी टूरिस्ट की हत्या

;;;;;

भारत का अंडमान और निकोबार द्वीप समूह प्राकृतिक सुंदरता, शांति और समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। लेकिन इसी स्वर्ग जैसे टापुओं के बीच बसा एक द्वीप ऐसा भी है जो सुंदर तो है, लेकिन खतरनाक इतना कि वहां जाना किसी के लिए भी मौत को न्योता देने जैसा है। हम बात कर रहे हैं नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड की, जो न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के सबसे खतरनाक स्थानों में से एक माना जाता है।

एक अमेरिकी नागरिक की हत्या से फिर सुर्खियों में

नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड की खतरनाक छवि तब फिर से सामने आई जब एक अमेरिकी टूरिस्ट जॉन एलन चौ (John Allen Chau) की यहां के आदिवासियों ने हत्या कर दी। वह किसी तरह इस द्वीप पर पहुंच गया, जहां सेंटिनलीज जनजाति के लोगों ने उसे मारकर रस्सियों में बांधा और समुद्र तट तक घसीटकर ले गए, फिर शव को रेत में दबा दिया। यह घटना साफ तौर पर दर्शाती है कि यह द्वीप किसी बाहरी व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं है।

सेंटिनलीज जनजाति: सभ्यता से कोसों दूर

इस द्वीप पर रहने वाली जनजाति को "सेंटिनलीज" कहा जाता है। ये लोग लगभग 60,000 साल से यहां रह रहे हैं और आधुनिक मानव सभ्यता से पूरी तरह कटे हुए हैं। उनके रहन-सहन, सोच, जीवनशैली और व्यवहार आज भी पाषाण युग जैसे हैं। वे न खेती करते हैं, न आधुनिक कपड़े पहनते हैं और न ही किसी प्रकार की तकनीक को अपनाते हैं।

इनका सामाजिक तंत्र भी आज तक बाहरी दुनिया के लिए रहस्य बना हुआ है। इन्हें जब भी कोई बाहरी व्यक्ति नजर आता है, तो ये तुरंत तीर-कमान, भाले और पत्थरों से हमला कर देते हैं।

भारत सरकार ने घोषित किया है प्रतिबंधित क्षेत्र

भारत सरकार ने इस द्वीप को पूरी तरह से निषिद्ध (Restricted Area) घोषित किया है। यहां न तो कोई जा सकता है, न ही ड्रोन या कैमरे से वीडियो बना सकता है। यहां तक कि अगर कोई गलती से भी इस द्वीप के करीब पहुंच जाए, तो उसकी जान जोखिम में पड़ सकती है। भारत सरकार ने इनके संरक्षण और इनकी संस्कृति की रक्षा के लिए सख्त कानून बना रखे हैं।

क्यों है यह द्वीप इतना खतरनाक?

इस द्वीप का खतरनाक होना कई कारणों से है:

  1. आक्रामक प्रवृत्ति: सेंटिनलीज किसी भी बाहरी व्यक्ति को अपनी जमीन पर देखना पसंद नहीं करते।

  2. सभ्यता से दूरी: इन्हें आधुनिक समाज और तकनीकी ज्ञान से कोई वास्ता नहीं है, जिससे डर और अविश्वास गहराया है।

  3. संक्रमण का खतरा: बाहरी दुनिया से संपर्क इनके लिए घातक हो सकता है क्योंकि इनका इम्यून सिस्टम सामान्य मनुष्यों से अलग है और छोटे-छोटे वायरस भी इनके लिए जानलेवा हो सकते हैं।

अतीत की घटनाएं जो इस द्वीप की क्रूरता को दर्शाती हैं

  • 1981 में एक जहाज "प्राइम रोज़" नॉर्थ सेंटिनल द्वीप के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जैसे ही जहाज तट के पास पहुंचा, सैकड़ों आदिवासी तीर-कमान लेकर वहां आ गए। किसी तरह क्रू मेंबर्स को बचाया गया।

  • 2004 की सुनामी के बाद जब भारत सरकार ने हेलिकॉप्टर से स्थिति जानने की कोशिश की, तो इन आदिवासियों ने आसमान से आ रहे हेलिकॉप्टर पर आग लगे तीरों से हमला कर दिया।

  • कई मछुआरे जो गलती से द्वीप के करीब चले गए, उन्हें भी इन आदिवासियों ने मार डाला।

जंगलों पर निर्भर जीवन

सैटेलाइट इमेज से यह स्पष्ट होता है कि यह जनजाति कृषि नहीं करती। यह आज भी शिकार, मछली पकड़ना और जंगल से मिलने वाले फल-सब्जियों पर निर्भर है। ये लोग शरीर पर वस्त्र भी नहीं पहनते और अपने पारंपरिक हथियारों से ही जीवन यापन करते हैं।

क्या भविष्य में इनसे संपर्क संभव है?

वैज्ञानिकों और मानवविज्ञानियों का मानना है कि सेंटिनलीज जनजाति को जबरदस्ती सभ्य समाज में लाना नैतिक रूप से गलत है। उन्हें उनकी स्थिति में सुरक्षित रहने देना ही बेहतर विकल्प है। अगर हम उनसे संपर्क बनाने की कोशिश करेंगे, तो उनकी संस्कृति नष्ट हो सकती है और उनकी जान को भी खतरा होगा।

निष्कर्ष: प्रकृति की गोद में छिपा खतरनाक द्वीप

नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड अपने रहस्य, संस्कृति और आक्रामक जनजाति के कारण दुनिया भर के वैज्ञानिकों, खोजकर्ताओं और मीडिया के लिए आकर्षण का केंद्र है। लेकिन यह जगह एक ऐसी चेतावनी भी है कि प्रकृति और मानव सभ्यता के बीच दूरी भी कभी-कभी जरूरी होती है।

यह द्वीप हमें यह सिखाता है कि हर क्षेत्र में घुसपैठ जरूरी नहीं होती, कुछ जगहें और कुछ संस्कृतियां अपने हाल में ही सुरक्षित और संरक्षित रहती हैं — बशर्ते हम उन्हें उनकी मर्यादा में रहने दें।

Share this story

Tags