12 साल तक फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के सहारे करता रहा नौकरी, झालावाड़ में वरिष्ठ अध्यापक गिरफ्तार
राजस्थान के झालावाड़ जिले में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक वरिष्ठ अध्यापक को गिरफ्तार किया है, जिसने कथित तौर पर दिव्यांग कोटे का लाभ उठाकर सरकारी सेवा प्राप्त की और करीब 12 वर्षों तक नौकरी करता रहा।
मामले के खुलासे के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। पुलिस और संबंधित विभाग अब पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रहे हैं।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मिली नौकरी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कथित रूप से फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र तैयार कर सरकारी नौकरी हासिल की थी। इसी दस्तावेज के आधार पर उसे दिव्यांग आरक्षण श्रेणी का लाभ मिला और बाद में वह वरिष्ठ अध्यापक के पद तक पहुंच गया।
शिकायत मिलने के बाद संबंधित दस्तावेजों की जांच कराई गई, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आने पर मामला दर्ज किया गया।
12 वर्षों तक उठाता रहा सरकारी लाभ
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी पिछले लगभग 12 वर्षों से सरकारी सेवा में कार्यरत था। इस दौरान उसे वेतन, पदोन्नति और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ भी मिलता रहा।
अब यह भी जांच की जा रही है कि नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ था और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी भूमिका रही है।
पुलिस ने किया गिरफ्तार
साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी वरिष्ठ अध्यापक को गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ की जा रही है और फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करने तथा उसका उपयोग करने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी प्रमाण पत्र किस माध्यम से तैयार कराया गया और इसमें कोई संगठित नेटवर्क तो शामिल नहीं था।
विभागीय कार्रवाई भी संभव
मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने भी रिपोर्ट तलब की है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, सेवा समाप्ति और अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
इसके अलावा सरकार को हुए वित्तीय नुकसान का आकलन भी किया जा सकता है और नियमों के अनुसार वसूली की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
अन्य मामलों की भी होगी जांच
प्रशासन अब दिव्यांग आरक्षण के तहत नियुक्त अन्य कर्मचारियों के दस्तावेजों की भी जांच कराने पर विचार कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सरकारी नियुक्तियों में दस्तावेजों के सत्यापन और पारदर्शिता की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करता है। पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की गहन जांच में जुटे हुए हैं।

