Samachar Nama
×

केसर है दुनिया का सबसे महंगा मसाला, क्या जानते हैं दूसरे नंबर पर है कौन? एक गलती से बर्बाद हो जाती है सारी फसल!
 

केसर है दुनिया का सबसे महंगा मसाला, क्या जानते हैं दूसरे नंबर पर है कौन? एक गलती से बर्बाद हो जाती है सारी फसल!

दुनिया में कई ऐसे मसाले हैं, जिनकी कीमत सामान्य मसालों के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है। इनमें सबसे चर्चित नाम केसर का है। केसर को दुनिया का सबसे महंगा मसाला कहा जाता है। इसकी थोड़ी सी मात्रा भी खाने की खुशबू, स्वाद और रंग बदल देती है। यही वजह है कि भारतीय मिठाइयों से लेकर कई पारंपरिक व्यंजनों तक में इसका इस्तेमाल खास मौकों पर किया जाता है। लेकिन आखिर केसर इतना महंगा क्यों है और क्या आप जानते हैं कि महंगे मसालों की सूची में दूसरे नंबर पर किसका नाम आता है?

एक फूल से निकलता है बेहद कम केसर

केसर Crocus sativus नाम के फूल से प्राप्त किया जाता है। इसके फूल में मौजूद लाल रंग के महीन धागेनुमा हिस्से यानी स्टिग्मा को हाथ से निकालकर सुखाया जाता है। यही सूखे हुए स्टिग्मा केसर के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं।

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक फूल से बहुत कम मात्रा में केसर मिलता है। इसलिए थोड़ी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाला केसर तैयार करने के लिए भी बड़ी संख्या में फूलों की जरूरत होती है। फूलों को संभालने और स्टिग्मा निकालने का काम भी बेहद सावधानी से किया जाता है।

यही वजह है कि केसर के उत्पादन में मशीनों की तुलना में मानव श्रम की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रहती है। कम पैदावार और ज्यादा मेहनत इसकी कीमत बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

दूसरे नंबर पर आता है प्राकृतिक वनीला

केसर के बाद प्राकृतिक वनीला दुनिया के सबसे महंगे मसालों में शामिल है। वनीला एक ऑर्किड प्रजाति के पौधे की फलियों से प्राप्त होती है। हालांकि बाजार में मिलने वाली हर वनीला प्राकृतिक नहीं होती। कई उत्पादों में सिंथेटिक वनीला फ्लेवर का इस्तेमाल किया जाता है।

प्राकृतिक वनीला तैयार करने की प्रक्रिया काफी लंबी होती है। पौधे में फूल आने के बाद परागण से लेकर फलियों के विकसित होने तक समय लगता है। कई जगहों पर फूलों का परागण हाथ से किया जाता है। फलियों की कटाई के बाद भी काम खत्म नहीं होता। उन्हें विशेष तरीके से क्योर यानी उपचारित किया जाता है, जिसके बाद उनका खास रंग, खुशबू और स्वाद विकसित होता है।

एक गलती से क्यों बिगड़ सकती है फसल?

केसर की खेती में मौसम और पानी का प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण होता है। खेत में जरूरत से ज्यादा नमी या पानी जमा होने से कंदों के खराब होने का खतरा बढ़ सकता है। दूसरी ओर, प्रतिकूल मौसम भी उत्पादन पर असर डाल सकता है।

फूलों की तुड़ाई का समय भी महत्वपूर्ण है। बहुत देर से तोड़े गए फूलों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसके बाद स्टिग्मा को अलग करने और सुखाने के दौरान भी सावधानी जरूरी है। गलत तरीके से सुखाने पर केसर की रंगत, खुशबू और गुणवत्ता खराब हो सकती है।

वनीला में भी छोटी सी लापरवाही महंगी पड़ सकती है। खासतौर पर परागण और क्योरिंग की प्रक्रिया में सही तापमान और नमी बनाए रखना जरूरी होता है। प्रक्रिया ठीक से नहीं होने पर फलियों की गुणवत्ता कम हो सकती है।

कीमत के पीछे छिपी है मेहनत

केसर और प्राकृतिक वनीला की ऊंची कीमत को सिर्फ उनकी दुर्लभता से नहीं समझा जा सकता। कम उत्पादन, विशेष परिस्थितियों में खेती, हाथ से होने वाला काम, लंबा उत्पादन चक्र और प्रोसेसिंग की जटिल प्रक्रिया इनकी कीमत बढ़ाती है।

यानी खाने में इस्तेमाल होने वाली चुटकी भर केसर या कुछ बूंदों जितनी खुशबू देने वाली प्राकृतिक वनीला के पीछे किसानों और उत्पादकों की लंबी मेहनत छिपी होती है। यही वजह है कि ये मसाले दुनिया के सबसे कीमती मसालों में अपनी अलग पहचान रखते हैं।

Share this story

Tags