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कॉकरोच के दूध पर रिसर्च: वैज्ञानिकों की नजर में बना ‘सुपरफूड’, जानिए क्या है इसकी खासियत

कॉकरोच के दूध पर रिसर्च: वैज्ञानिकों की नजर में बना ‘सुपरफूड’, जानिए क्या है इसकी खासियत

कॉकरोच का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में गंदगी और डर की तस्वीर आती है, लेकिन वैज्ञानिकों ने कॉकरोच की एक खास प्रजाति के दूध जैसे पदार्थ पर रिसर्च कर दुनिया को चौंका दिया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पैसिफिक बीटल कॉकरोच (Diploptera punctata) अपने बच्चों को पोषण देने के लिए एक खास तरह का दूध जैसा पदार्थ बनाता है, जिसमें प्रोटीन और ऊर्जा की मात्रा काफी अधिक पाई गई है।

कॉकरोच का दूध कैसे बनता है?

आमतौर पर कॉकरोच अंडे देते हैं, लेकिन Diploptera punctata एक ऐसी प्रजाति है जो बच्चों को जन्म देती है। मादा कॉकरोच अपने भ्रूणों को पोषण देने के लिए एक तरल पदार्थ का उत्पादन करती है, जिसे वैज्ञानिक "कॉकरोच मिल्क" कहते हैं। यह सामान्य दूध नहीं होता, बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर एक विशेष स्राव होता है।

शोध के अनुसार, इस पदार्थ में मौजूद प्रोटीन क्रिस्टल के रूप में पाए जाते हैं, जो धीरे-धीरे ऊर्जा और पोषण उपलब्ध कराते हैं। वैज्ञानिकों ने इन प्रोटीनों को लिपोकैलिन जैसे मिल्क प्रोटीन (Lili-Mip) के रूप में पहचाना है।

गाय के दूध से ज्यादा पोषक होने का दावा

कुछ शुरुआती अध्ययनों में पाया गया कि कॉकरोच के इस दूध जैसे पदार्थ में प्रोटीन, वसा और ऊर्जा की मात्रा काफी अधिक हो सकती है। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने इसे भविष्य के संभावित "सुपरफूड" के रूप में अध्ययन करना शुरू किया।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि इसे सीधे इंसानों के पीने के लिए तैयार किया जा चुका है। अभी इस पर और शोध की जरूरत है, जिसमें सुरक्षा, उत्पादन और मानव शरीर पर प्रभाव जैसे पहलुओं को समझना जरूरी है।

क्या इंसान पी सकेंगे कॉकरोच का दूध?

वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसका बड़े स्तर पर उत्पादन और सुरक्षित उपयोग है। कॉकरोच से सीधे दूध निकालना व्यावहारिक नहीं है, इसलिए वैज्ञानिक इसके प्रोटीन को प्रयोगशाला में तैयार करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।

अगर भविष्य में यह तकनीक सफल होती है तो यह बढ़ती आबादी के लिए वैकल्पिक पोषण स्रोत उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है।

अभी नहीं है खाने-पीने की चीज

हालांकि कॉकरोच मिल्क को लेकर काफी उत्सुकता है, लेकिन फिलहाल यह बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थ नहीं है। इसे लेकर कई वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी परीक्षण अभी बाकी हैं।

कॉकरोच के दूध पर हो रही रिसर्च यह दिखाती है कि प्रकृति में मौजूद छोटे जीव भी पोषण और जैविक विज्ञान के क्षेत्र में बड़े रहस्य छिपाए हुए हैं। आने वाले समय में यह शोध खाद्य विज्ञान और जैव तकनीक के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकता है।

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