राजस्थान के टेलर को ₹974 करोड़ का इनकम टैक्स नोटिस, महीने की कमाई सिर्फ 15 हजार; बोले- मैं तो गुजरात भी नहीं गया
राजस्थान के अजमेर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने टैक्स और पहचान से जुड़े फर्जीवाड़े पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोविंदगढ़ निवासी 62 वर्षीय दर्जी रेखराज ठाड़ा को आयकर विभाग की ओर से करीब 974 करोड़ 97 लाख 25 हजार 457 रुपये की टैक्स रिकवरी का नोटिस मिला है। हैरानी की बात यह है कि रेखराज की मासिक कमाई करीब 15 हजार रुपये बताई जा रही है। उनका कहना है कि उन्होंने कभी इतना बड़ा कारोबार नहीं किया और वह तो कभी गुजरात तक नहीं गए।
नोटिस देखकर परिवार के उड़े होश
रेखराज गोविंदगढ़ में सिलाई का काम करते हैं। इसके अलावा वह एलआईसी एजेंट के तौर पर भी काम करते हैं। परिवार के मुताबिक, 13 अगस्त को सूरत आयकर विभाग की ओर से नोटिस मिलने के बाद उनके होश उड़ गए। नोटिस में रेखराज पर करीब 974.97 करोड़ रुपये की टैक्स देनदारी बताई गई थी।
रेखराज का कहना है कि इतनी बड़ी रकम का कारोबार करना तो दूर, उन्होंने कभी किसी डायमंड कंपनी में काम तक नहीं किया। उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर उनके नाम पर इतना बड़ा टैक्स कैसे बन गया।
PAN कार्ड के दुरुपयोग का आरोप
मामला सामने आने के बाद परिवार ने एक परिचित चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद से दस्तावेज और कंपनी रिकॉर्ड खंगाले। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि रेखराज के PAN कार्ड का इस्तेमाल कर उन्हें ‘रूप रजत डायमंड प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी का डायरेक्टर बताया गया था।
रेखराज के मुताबिक, उन्हें इस कंपनी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उनका दावा है कि वह कभी गुजरात नहीं गए और न ही उन्होंने वहां किसी कंपनी का संचालन किया। परिवार को आशंका है कि उनके PAN कार्ड और दूसरे पहचान दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर यह फर्जीवाड़ा किया गया।
दूसरी डायमंड कंपनी में भी मिला नाम
परिवार की पड़ताल में एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। रेखराज का नाम ‘जय बाबेरी डायम प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की दूसरी कंपनी में भी डायरेक्टर के तौर पर दर्ज मिला। इसके बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई। अब सवाल उठ रहा है कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल और कितनी कंपनियों में किया गया और उनके नाम से कितना कारोबार किया गया।
पुलिस और आयकर विभाग से की शिकायत
नोटिस मिलने के बाद रेखराज ने आयकर विभाग को ईमेल के जरिए अपना जवाब भेजा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संबंधित कंपनियों या इतने बड़े वित्तीय लेनदेन से कोई संबंध नहीं है।
इसके साथ ही उन्होंने पुलिस से भी शिकायत की है। रेखराज पीसांगन थाने और अजमेर एसपी कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए परिवाद दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अब जांच में खुलेंगे बड़े राज
इस मामले में अब कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। आखिर रेखराज के PAN कार्ड का इस्तेमाल किसने किया? उनके नाम पर कंपनियों में डायरेक्टर की नियुक्ति कैसे हुई? इन कंपनियों के बैंक खातों में कितना कारोबार हुआ और 974 करोड़ रुपये की टैक्स देनदारी किस लेनदेन से जुड़ी है?
फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग इन सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। अगर रेखराज के दस्तावेजों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो यह मामला पहचान की चोरी और वित्तीय फर्जीवाड़े का गंभीर उदाहरण बन सकता है। वहीं, 15 हजार रुपये महीने की कमाई करने वाले एक साधारण टेलर के नाम पर अरबों रुपये की टैक्स देनदारी सामने आने से यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

