इंसानी शरीर में 9 महीने चली सुअर की किडनी, कॉकरोच के दूध पर रिसर्च; विज्ञान की दुनिया की चौंकाने वाली खोजें
विज्ञान की दुनिया में लगातार ऐसी खोजें सामने आ रही हैं, जो कभी कल्पना जैसी लगती थीं। हाल के वर्षों में वैज्ञानिकों ने ऐसे प्रयोग किए हैं, जिनमें जानवरों के अंगों को इंसानों में इस्तेमाल करने से लेकर कीड़ों से मिलने वाले पोषण तक पर शोध किया जा रहा है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा सुअर की जेनेटिकली मॉडिफाइड किडनी के इंसानी शरीर में सफल इस्तेमाल और कॉकरोच के दूध पर हुई रिसर्च की है।
सुअर की किडनी ने 9 महीने तक किया इंसानी शरीर में काम
मेडिकल साइंस में अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) के क्षेत्र में बड़ा कदम सामने आया है। वैज्ञानिकों ने जेनेटिक बदलाव वाली सुअर की किडनी को एक इंसान के शरीर में प्रत्यारोपित किया, जिसने करीब 9 महीने तक काम किया। यह प्रयोग उन मरीजों के लिए उम्मीद जगा रहा है, जिन्हें मानव अंग मिलने का लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
इस तकनीक को जेनोट्रांसप्लांटेशन (Xenotransplantation) कहा जाता है, जिसमें एक प्रजाति के अंग को दूसरी प्रजाति के शरीर में लगाया जाता है। सुअर के अंगों को इंसानों के लिए अधिक अनुकूल बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया, ताकि शरीर उसे आसानी से स्वीकार कर सके और अंग रिजेक्ट होने का खतरा कम हो।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक मरीज में सुअर की किडनी ने करीब 271 दिनों तक काम किया। इसके बाद मरीज को मानव किडनी ट्रांसप्लांट मिली। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक अंगों की कमी को दूर करने में मदद कर सकती है।
कॉकरोच के दूध पर वैज्ञानिकों की नजर
दूसरी ओर, वैज्ञानिक कॉकरोच से मिलने वाले एक खास पोषक पदार्थ पर भी रिसर्च कर चुके हैं। कुछ प्रजातियों के कॉकरोच अपने बच्चों को पोषण देने के लिए एक तरह का क्रिस्टल जैसा दूध बनाते हैं, जिसमें प्रोटीन और ऊर्जा की मात्रा काफी अधिक पाई गई है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि इस पदार्थ में मौजूद पोषक तत्व भविष्य में नए तरह के खाद्य विकल्पों और पोषण संबंधी शोध में उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, इसे इंसानों के भोजन के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर अभी काफी शोध और परीक्षण बाकी हैं।
विज्ञान बदल रहा है इलाज और पोषण की तस्वीर
सुअर की किडनी का इंसानों में इस्तेमाल और कॉकरोच के दूध पर रिसर्च जैसे प्रयोग दिखाते हैं कि विज्ञान लगातार नई संभावनाओं की तलाश कर रहा है। जहां एक ओर अंगों की कमी दूर करने के लिए नए रास्ते खोजे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक पोषण स्रोतों पर भी काम हो रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी तकनीकों को आम लोगों तक पहुंचाने से पहले सुरक्षा, नैतिकता और लंबे समय के प्रभावों की गहराई से जांच जरूरी है। आने वाले वर्षों में ये खोजें चिकित्सा और पोषण के क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकती हैं।

