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इंसान के दिमाग को बेवकूफ बनाते हैं मिर्च और पुदीना, क्या है आग और ठंडक का खेल?
 

इंसान के दिमाग को बेवकूफ बनाते हैं मिर्च और पुदीना, क्या है आग और ठंडक का खेल?

खाना खाते समय मिर्च से मुंह में तेज जलन महसूस होती है, वहीं पुदीना खाते ही मुंह में ठंडक का एहसास होने लगता है। दिलचस्प बात यह है कि न तो मिर्च वास्तव में मुंह को जला रही होती है और न ही पुदीना मुंह का तापमान अचानक कम कर देता है। दरअसल, यह हमारे दिमाग और शरीर की संवेदन प्रणाली के बीच होने वाला एक दिलचस्प खेल है।

मिर्च खाने पर क्यों लगती है आग?

मिर्च में कैप्साइसिन नाम का एक रासायनिक यौगिक पाया जाता है। जब हम मिर्च खाते हैं तो कैप्साइसिन मुंह और जीभ में मौजूद कुछ विशेष रिसेप्टर्स को सक्रिय करता है। इन्हें मुख्य रूप से TRPV1 रिसेप्टर कहा जाता है।

TRPV1 रिसेप्टर शरीर में गर्मी और तेज तापमान से जुड़ी संवेदनाओं को पहचानने में मदद करते हैं। कैप्साइसिन इन रिसेप्टर्स को इस तरह सक्रिय करता है कि दिमाग को संकेत मिलने लगता है कि मुंह में बहुत ज्यादा गर्मी या जलन हो रही है।

यही वजह है कि मिर्च खाने के बाद हमें ऐसा लगता है जैसे मुंह में आग लगी हो। हालांकि, सामान्य मात्रा में मिर्च खाने से वास्तव में मुंह का तापमान उसी तरह नहीं बढ़ता, जैसा इस जलन की अनुभूति से लगता है। यानी मिर्च मुख्य रूप से गर्मी का एहसास पैदा करती है

फिर पुदीना ठंडा कैसे कर देता है?

अब बात करते हैं पुदीने की। पुदीने में मौजूद मेंथॉल इसके ठंडक देने वाले एहसास के लिए जिम्मेदार होता है। मेंथॉल मुंह और त्वचा में मौजूद TRPM8 रिसेप्टर्स को सक्रिय करता है। ये रिसेप्टर्स ठंडे तापमान से जुड़ी संवेदना को पहचानते हैं।

जब मेंथॉल इन रिसेप्टर्स को सक्रिय करता है तो दिमाग को ऐसा संकेत मिलता है कि मुंह के आसपास ठंडक है। इसी कारण पुदीना खाने, च्युइंग गम चबाने या मेंथॉल वाली चीजों का इस्तेमाल करने के बाद ठंडक महसूस होती है।

असली खेल दिमाग का है

मिर्च और पुदीने की सबसे खास बात यही है कि वे हमारे तापमान महसूस करने वाले तंत्र को प्रभावित करते हैं। मिर्च का कैप्साइसिन गर्मी और जलन का संकेत पैदा करता है, जबकि मेंथॉल ठंडक का संकेत देता है।

इसीलिए मिर्च खाने के बाद पानी पीने पर हमेशा जलन पूरी तरह खत्म नहीं होती। कैप्साइसिन पानी में आसानी से नहीं घुलता। दूसरी ओर, पुदीने की ठंडक भी मुख्य रूप से एक संवेदना है, न कि मुंह के तापमान में कोई बड़ा बदलाव।

क्यों है यह शरीर के लिए दिलचस्प?

वैज्ञानिकों के लिए यह प्रक्रिया इस बात का अच्छा उदाहरण है कि हमारा दिमाग केवल तापमान को सीधे महसूस नहीं करता, बल्कि शरीर से मिलने वाले रासायनिक और तंत्रिका संकेतों की व्याख्या करके हमें गर्मी या ठंडक का अनुभव कराता है।

यानी मिर्च की 'आग' और पुदीने की 'ठंडक' के पीछे असली कहानी तापमान से ज्यादा रिसेप्टर्स और दिमाग के बीच होने वाले संकेतों की है। एक तरफ कैप्साइसिन गर्मी का अलार्म बजाता है, तो दूसरी तरफ मेंथॉल ठंडक का संदेश भेजता है। यही कारण है कि ये दोनों चीजें इंसान के दिमाग को तापमान के मामले में एक तरह से 'भ्रमित' कर देती हैं।

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