Parenting Tips: 19 साल के बेटे को लेकर मां ने कही ऐसी बात, सोशल मीडिया पर चर्चा में आया वीडियो
Parenting Tips: बच्चों की परवरिश आसान काम नहीं है। खासकर जब बच्चे किशोरावस्था से निकलकर युवावस्था की ओर बढ़ते हैं, तब उनके विचार, व्यवहार और फैसलों को लेकर माता-पिता के साथ मतभेद बढ़ सकते हैं। इसी विषय से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें एक मां ने अपने 19 साल के बेटे के व्यवहार और उसे संभालने के तरीके के बारे में बात की है।
सोशल मीडिया पर शेयर की गई पोस्ट के मुताबिक, कंटेंट क्रिएटर मीनू ने बताया कि उनका बेटा 19 साल की उम्र में ही काफी परिपक्व और आत्मविश्वासी तरीके से व्यवहार करता है। मां के अनुसार, कई बार उसे लगता है कि उससे बड़ा या ज्यादा सही सोचने वाला कोई नहीं है।
बेटे से बहस को लेकर मां ने बताया अपना तरीका
मिलिए मीनू से, ये कंटेंट क्रिएटर है, एक माँ के रूप में टीनएजर बेटे की जल्दी बड़ा होने की सोच को कैसे कंट्रोल करे वो बता रही है l
— Vishal M. Yadav (@VishalMYadav_) September 13, 2026
ये कहती है कि मेरा बेटा 19 साल की उम्र में ऐसे दिखाता है कि ये 40 साल की सोच रखता है और अपने आगे किसी को सही नहीं मानता है,
फिर इसकी माँ कहती है की… pic.twitter.com/OLiJteYQXU
मीनू के मुताबिक, जब उनके बेटे और उनके बीच किसी बात को लेकर बहस होती है, तो वह बातचीत को बीच में छोड़ने के बजाय अपनी बात समझाने की कोशिश करती हैं। उनका कहना है कि वह तब तक उससे तर्क करती हैं, जब तक बेटा यह स्वीकार न कर ले कि इस मामले में उसकी बात गलत थी।
हालांकि, हर परिवार में बच्चों और माता-पिता के बीच बातचीत का तरीका अलग हो सकता है। बढ़ती उम्र में बच्चों को अपनी स्वतंत्र राय रखने की जरूरत होती है, लेकिन साथ ही उन्हें जिम्मेदारी और दूसरों के विचारों का सम्मान करना भी सीखना होता है।
19 साल की उम्र में क्यों बढ़ते हैं मतभेद?
किशोरावस्था के बाद युवा अपने फैसलों को लेकर ज्यादा स्वतंत्र होना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि वे अपने जीवन के बारे में खुद निर्णय लेने में सक्षम हैं। दूसरी तरफ माता-पिता अपने अनुभव के आधार पर उन्हें सलाह देना चाहते हैं।
इसी अंतर के कारण कई परिवारों में छोटी-छोटी बातों पर बहस या मतभेद की स्थिति बन जाती है। ऐसे समय में केवल रोक-टोक करने के बजाय बच्चे की बात सुनना और अपनी चिंताओं को शांत तरीके से समझाना भी जरूरी माना जाता है।
मां ने दी माता-पिता को एक सलाह
वीडियो में मीनू ने यह भी कहा कि माता-पिता को बच्चों की हर बात को बिना सवाल किए स्वीकार नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर इस उम्र में बच्चों को हर चीज में पूरी छूट दे दी जाए, तो आगे चलकर उनके व्यवहार और पारिवारिक रिश्तों पर इसका असर पड़ सकता है।
उनकी बात का मुख्य जोर बच्चों को जिम्मेदारी, अनुशासन और माता-पिता के सम्मान का महत्व समझाने पर है। हालांकि, बच्चों को अनुशासन में रखने का तरीका परिवार और बच्चे के स्वभाव के अनुसार अलग हो सकता है।
पालन-पोषण में संवाद सबसे जरूरी
19 साल की उम्र में बच्चे अब छोटे नहीं रहते, इसलिए उनके साथ बातचीत करते समय उनकी स्वतंत्रता और राय का सम्मान करना भी जरूरी है। माता-पिता की भूमिका केवल नियम तय करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उन्हें सही-गलत के बीच फर्क समझाने और मुश्किल परिस्थितियों में मार्गदर्शन देने की भी जरूरत होती है।
सोशल मीडिया पर सामने आए इस वीडियो ने एक बार फिर यह चर्चा छेड़ दी है कि बड़े होते बच्चों के साथ माता-पिता को सख्ती, दोस्ताना व्यवहार और संवाद के बीच किस तरह संतुलन बनाना चाहिए।

