‘यहां कोई चीज खराब या तोड़ता नहीं है...’ साउथ कोरिया की बसों में सिविक सेंस देख भारतीय महिला हुईं प्रभा
दक्षिण कोरिया की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और वहां के लोगों के सिविक सेंस को लेकर एक भारतीय महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। महिला ने दक्षिण कोरिया में बस से यात्रा करने के दौरान अपने अनुभव साझा किए और बताया कि वहां सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर लोगों में जिम्मेदारी और अनुशासन की भावना देखकर वह काफी प्रभावित हुईं।
वायरल वीडियो में भारतीय महिला दक्षिण कोरिया की बसों में मौजूद सुविधाओं और यात्रियों के व्यवहार के बारे में बात करती नजर आ रही हैं। उन्होंने खास तौर पर इस बात पर ध्यान दिया कि बस में कई तरह की सुविधाएं मौजूद होने के बावजूद लोग उन्हें नुकसान पहुंचाने या तोड़ने की कोशिश नहीं करते।
महिला ने कहा कि वहां सार्वजनिक परिवहन में यात्रियों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और लोग उनका इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ करते हैं। उनके मुताबिक, बस में लगे सामान या सुविधाओं को खराब करना सामान्य व्यवहार नहीं है। उन्होंने इसे वहां के लोगों के मजबूत सिविक सेंस से जोड़कर देखा।
महिला के अनुसार, दक्षिण कोरिया में लोग सार्वजनिक जगहों को भी उसी तरह इस्तेमाल करते हैं जैसे वे अपनी निजी संपत्ति का ध्यान रखते हैं। बसों में सफाई बनाए रखना, निर्धारित नियमों का पालन करना और दूसरे यात्रियों का ध्यान रखना वहां की रोजमर्रा की संस्कृति का हिस्सा नजर आता है।
वीडियो सामने आने के बाद भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इस मुद्दे पर चर्चा शुरू कर दी। कई लोगों ने कहा कि भारत में भी सार्वजनिक परिवहन और सार्वजनिक संपत्ति को लेकर इसी तरह की जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की जरूरत है। कुछ यूजर्स ने माना कि सरकारी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने से आखिरकार उसका नुकसान आम लोगों को ही होता है।
कई लोगों ने यह भी कहा कि भारत में बसों, ट्रेनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर तोड़फोड़ या गंदगी की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे मामलों में लोगों की जागरूकता और प्रशासन की निगरानी दोनों महत्वपूर्ण हैं। अगर लोग सार्वजनिक संपत्ति को अपना समझकर उसका इस्तेमाल करें तो सुविधाओं को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में रखा जा सकता है।
हालांकि, कुछ यूजर्स ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया की जनसंख्या, शहरों की संरचना और सामाजिक परिस्थितियां अलग हैं। इसलिए दोनों देशों की सीधी तुलना करना आसान नहीं है। इसके बावजूद सिविक सेंस और सार्वजनिक संपत्ति के प्रति जिम्मेदारी जैसी अच्छी आदतों से सीख ली जा सकती है।
दक्षिण कोरिया की बसों में महिला को दिखाई देने वाली व्यवस्था ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि किसी शहर या देश की सुविधाओं को बेहतर बनाए रखने में सिर्फ सरकार की भूमिका होती है या आम नागरिकों की भी उतनी ही जिम्मेदारी होती है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भारतीय महिला का अनुभव इसी ओर इशारा करता है कि अच्छी सार्वजनिक सुविधाओं के साथ उनका जिम्मेदारी से इस्तेमाल भी उतना ही जरूरी है। महिला की प्रतिक्रिया को लेकर यूजर्स दक्षिण कोरिया की व्यवस्था के साथ-साथ भारत में सिविक सेंस को लेकर भी अपनी राय साझा कर रहे हैं।

