मऊ रेलवे स्टेशन पर धमकी का नया मामला, पार्सल अधीक्षक ने RPF जवान को दी चेतावनी
उत्तर प्रदेश में इन दिनों लोगों को धमकाने और उनके साथ बदसलूकी करने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कानपुर की आस्था सिंह के विवाद अभी शांत भी नहीं हुए थे कि मऊ जिले से एक नया मामला सामने आया है, जिसने लोगों में चिंता और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, मऊ रेलवे स्टेशन पर तैनात एक पार्सल अधीक्षक (Parcel Superintendent) ने एक आरपीएफ (RPF) जवान के साथ मार्मिक और सार्वजनिक रूप से अभद्र व्यवहार किया। अधीक्षक ने जवान को धमकी देते हुए कहा कि वह उसकी ‘आंखें निकाल देगा’ और सरेआम उसे उसकी औकात दिखा दी। यह घटना स्टेशन पर मौजूद लोगों और सहकर्मियों के सामने हुई, जिससे पूरे इलाके में डर और विवाद फैल गया।
रेलवे सुरक्षा बल और प्रशासन ने बताया कि यह मामला गंभीर सुरक्षा उल्लंघन और अभद्रता का उदाहरण है। आरपीएफ जवान ने घटना की शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने तुरंत संबंधित अधिकारी की जांच शुरू कर दी है। जांच में सभी सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और घटनास्थल पर मौजूद कर्मचारियों से जानकारी जुटाई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से न केवल रेलवे सुरक्षा बल की साख और आत्मविश्वास प्रभावित होता है, बल्कि सामान्य जनता में भी सुरक्षा और भरोसे को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई और कठोर कदम उठाए जाएं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां पद और शक्ति का दुरुपयोग करके आम लोगों और अधिकारियों को धमकाया गया। मऊ का यह मामला इसी प्रवृत्ति को दर्शाता है। उन्होंने प्रशासन और रेलवे अधिकारियों से आग्रह किया कि कानून और मर्यादा का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
रेलवे सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि इस घटना की गहन जांच चल रही है और दोषियों को कानूनी रूप से दंडित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में स्टेशन और रेलवे परिसरों में सुरक्षा बढ़ाने के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं, ताकि कर्मचारी और सुरक्षा बल दोनों ही सुरक्षित महसूस कर सकें।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल शक्ति या पद का होना किसी को अनुचित व्यवहार और धमकी देने का अधिकार नहीं देता। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन और संगठन के नियमों का पालन करना हर कर्मचारी की जिम्मेदारी है।
मामले का असर स्थानीय कर्मचारियों और आम यात्रियों पर भी देखा जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले कर्मचारी और यात्री दोनों ही अब अधिक सतर्क हैं और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में बढ़ते ऐसे घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर अनुशासन और मर्यादा को बनाए रखना बेहद आवश्यक है। मऊ रेलवे स्टेशन का यह मामला सरकार और रेलवे प्रशासन के लिए सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

