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गाय के पेट में चुंबक डालकर निकाली गईं कीलें, पशु चिकित्सकों की सूझबूझ से बची जान

गाय के पेट में चुंबक डालकर निकाली गईं कीलें, पशु चिकित्सकों की सूझबूझ से बची जान

एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक गाय के पेट में चुंबक डालकर उसके शरीर में मौजूद कीलें निकाली गईं। यह घटना पशुपालकों और ग्रामीणों के लिए राहत की खबर भी बनी, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर गाय की जान पर गंभीर खतरा बन सकता था।

जानकारी के अनुसार, गाय पिछले कुछ दिनों से असहज व्यवहार कर रही थी। वह न तो ठीक से चारा खा रही थी और न ही सामान्य रूप से उठ-बैठ पा रही थी। पशुपालक को शुरुआत में समझ नहीं आया कि समस्या क्या है, लेकिन जब स्थिति लगातार बिगड़ती गई तो उन्होंने पशु चिकित्सक से संपर्क किया।

पशु चिकित्सकों की टीम ने प्राथमिक जांच के बाद आशंका जताई कि गाय ने चारे के साथ-साथ लोहे की कील या अन्य नुकीली धातु की वस्तु निगल ली है। यह स्थिति बेहद खतरनाक मानी जाती है, क्योंकि ऐसी वस्तुएं पेट और आंतों में गंभीर चोट पहुंचा सकती हैं और कई बार जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने आधुनिक और सुरक्षित तकनीक का सहारा लिया। गाय के पेट में एक विशेष चुंबक (मैगनेट) डाला गया, ताकि शरीर के अंदर मौजूद लोहे की कीलें आकर्षित होकर एक स्थान पर आ सकें। कुछ समय बाद जब चुंबक को बाहर निकाला गया तो उसके साथ कई कीलें और धातु के टुकड़े चिपके हुए मिले।

डॉक्टरों के अनुसार, यह एक प्रभावी और कम जोखिम वाली प्रक्रिया है, जो विशेष रूप से “ट्रॉमेटिक रेटिकुलाइटिस” जैसे मामलों में अपनाई जाती है। इस बीमारी में गायें अक्सर चारे के साथ धातु की वस्तुएं निगल लेती हैं, जिससे उनके पेट के अंदर घाव बन जाते हैं।

इलाज के बाद गाय की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखा गया है। पशु चिकित्सकों ने उसे कुछ दिनों तक निगरानी में रखने और हल्का आहार देने की सलाह दी है। साथ ही पशुपालकों को चेतावनी दी गई है कि वे अपने पशुओं को ऐसे स्थानों पर न चरने दें, जहां लोहे की कीलें, तार या अन्य धातु के टुकड़े पड़े हों।

स्थानीय ग्रामीणों ने पशु चिकित्सकों की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। उनका कहना है कि यदि समय पर इलाज नहीं किया जाता तो गाय की हालत गंभीर हो सकती थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या आम है, क्योंकि कई बार निर्माण कार्यों या कचरे के कारण जमीन पर लोहे के टुकड़े बिखरे रहते हैं, जिन्हें पशु अनजाने में खा लेते हैं।

यह मामला न केवल पशु चिकित्सा की आधुनिक तकनीक का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समय पर सही इलाज से गंभीर से गंभीर स्थिति को भी नियंत्रित किया जा सकता है।

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