कई बार जीवन में खुशियां अचानक मातम में बदल जाती हैं, और कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जो दिल को झकझोर देती हैं। वेल्स की एक महिला गेम्मा विलियम की कहानी भी ऐसी ही है, जिसने अपनी मासूम बेटी को खो दिया। यह घटना पांच साल पहले की है, लेकिन आज भी इसकी पीड़ा गेम्मा और उसके परिवार के दिलों में ताजा है। इस दर्दनाक अनुभव ने उन्हें जागरूकता अभियान चलाने के लिए प्रेरित किया ताकि किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
मासूम बेटी की अचानक मौत
33 साल की गेम्मा विलियम अपनी तीन महीने की बेटी लेक्सी को लेकर वेल्स के कारमर्थेनशायर में एक शॉपिंग मॉल गई थीं। वह अपनी बेटी को प्रैम यानी बच्चों की झूला गाड़ी में लेकर शॉपिंग कर रही थीं। लेकिन गेम्मा शॉपिंग में इतनी व्यस्त हो गईं कि बेटी का ख्याल रखना उनसे छूट गया। इसी दौरान बच्ची प्रैम में बेहोश हो गई।
गेम्मा ने बताया कि जब उन्होंने अपनी बेटी का रिएक्शन पाने की कोशिश की तो उसे कोई जवाब नहीं मिला। वे तुरंत शॉपिंग छोड़ कर अपनी कार की ओर भागीं और उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर बच्ची को बचा नहीं पाए। बाद में पता चला कि लेक्सी एक दुर्लभ बीमारी ‘टोटल एनोसलस पुलमोनरी वीनस ड्रेनेज’ से पीड़ित थी, जो जन्म के बाद ठीक से पहचान नहीं पाई गई थी।
टोटल एनोसलस पुलमोनरी वीनस ड्रेनेज क्या है?
यह एक जटिल हृदय संबंधी बीमारी है, जिसमें फेफड़ों की नसों में खून सही तरीके से नहीं बह पाता और शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। नवजात शिशुओं में इस बीमारी का जल्द पता न लगने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। गेम्मा की बेटी को यह बीमारी जन्म के बाद डिटेक्ट नहीं की गई थी, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ी और अंततः उसकी जान चली गई।
दर्दनाक अनुभव और जागरूकता का मिशन
लेक्सी की मौत के पांच साल बाद भी गेम्मा और उनके पति जेसन इस हादसे की पीड़ा से उबर नहीं पाए हैं। लेकिन इस दुखद अनुभव ने उन्हें एक नेक काम के लिए प्रेरित किया है। वे दोनों मिलकर अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को नवजात शिशुओं की हार्ट कंडीशन की जांच करने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
उनका मकसद है कि डॉक्टर और अस्पताल ऐसी लापरवाही न करें, जिससे कई मासूम बच्चों की जान बचाई जा सके। गेम्मा ने कई बार मीडिया से इस बात को साझा किया है कि कैसे एक छोटी सी चूक एक बच्चे की जिंदगी छीन सकती है और परिवार को अनगिनत आंसू बहाने पर मजबूर कर सकती है।
परिवार की दर्दनाक यात्रा
गेम्मा ने बताया कि वह अपनी बेटी के साथ उस दिन का सोचकर भी भावुक हो जाती हैं। वह याद करती हैं कि कैसे अपनी बेटी की तबियत बिगड़ने पर वे चिंतित हो उठीं, लेकिन उस समय उन्हें यह नहीं पता था कि उनकी बच्ची एक गंभीर बीमारी से जूझ रही है।
उनके लिए यह हादसा सिर्फ एक व्यक्तिगत नुकसान नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतना का विषय भी बन गया है। उन्होंने अपनी बेटी की याद में कई कैंपेन और कार्यक्रमों का आयोजन किया है, ताकि नवजात बच्चों की स्वास्थ्य जांच में सुधार हो और उनके परिवारों को ऐसी दर्दनाक हानि न सहनी पड़े।
निष्कर्ष
गेम्मा विलियम की कहानी हमें याद दिलाती है कि स्वास्थ्य जांच में कोई भी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। यह एक जरूरी बात है कि नवजात बच्चों की पूरी तरह से जांच हो, खासकर हृदय संबंधी बीमारियों के लिए, ताकि समय रहते उनका इलाज हो सके।
हर परिवार के लिए बच्चे की सुरक्षा और उसकी सेहत सबसे अहम होती है। गेम्मा और जेसन जैसे माता-पिता की जागरूकता से यह उम्मीद जगती है कि भविष्य में ऐसे हादसे कम होंगे। हमें भी इस संदेश को आगे बढ़ाना चाहिए ताकि हर नवजात बच्चा स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सके।
यह दुखद कहानी एक चेतावनी है, जो हर माता-पिता को सचेत करती है कि अपने बच्चों की छोटी-छोटी स्वास्थ्य समस्याओं को नजरअंदाज न करें और समय-समय पर उनकी जाँच करवाते रहें।
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