करोड़ों के पैकेज से ज्यादा खुशी 20 हजार में मिली’, 1.05 करोड़ कमाने वाले टेकी की कहानी ने बदली सफलता की परिभाषा
नई दिल्ली। आज के दौर में ज्यादातर युवा बेहतर नौकरी, बड़ी सैलरी और करोड़ों के पैकेज को सफलता का पैमाना मानते हैं। लेकिन बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कहानी ने इस सोच पर सवाल खड़ा कर दिया है। करीब 1.05 करोड़ रुपये सालाना पैकेज तक पहुंच चुके इस टेक प्रोफेशनल का कहना है कि उन्हें अपने करियर की सबसे ज्यादा खुशी उस वक्त मिली थी, जब उनकी मासिक सैलरी सिर्फ 20 हजार रुपये थी। उनकी यह कहानी Reddit पर शेयर होने के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।
टियर-3 कॉलेज से शुरू हुआ सफर
वायरल पोस्ट के मुताबिक, इस टेकी ने 2012 में एक टियर-3 कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद पहली नौकरी हासिल करने में उन्हें करीब छह महीने का समय लगा। करियर की शुरुआत में उनकी सैलरी 14,300 रुपये प्रति माह थी।
इसके बाद उनकी आमदनी धीरे-धीरे बढ़ती गई। 20 हजार, 32 हजार और फिर 60 हजार रुपये मासिक तक पहुंचने के बाद जब वह बेंगलुरु आए तो उनका सालाना पैकेज करीब 13 लाख रुपये हो गया। इसके बाद करियर में तेजी से ग्रोथ हुई और पैकेज 25 लाख, 40 लाख, 60 लाख, 80 लाख होते हुए आखिरकार 1.05 करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच गया।
20 हजार की सैलरी में क्यों मिली सबसे ज्यादा खुशी?
टेकी के मुताबिक, उनकी जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव तब आया जब सैलरी 14,300 से बढ़कर 20 हजार रुपये हुई। उस वक्त उन्हें लगा कि अब वह अपनी जिंदगी में कुछ ऐसी चीजें कर सकते हैं, जो पहले मुश्किल थीं।
उन्होंने बताया कि इस सैलरी के बाद उन्होंने बस से सफर करना छोड़ दिया और अपनी पसंद की बाइक खरीदी। उनके लिए यह छोटी सी उपलब्धि बेहद खास थी और उन्होंने उस दौर को जमकर एंजॉय किया।
उनका मानना है कि एक निश्चित आय के बाद सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी से जीवन की खुशियां उसी अनुपात में नहीं बढ़तीं। बल्कि 25 से 30 लाख रुपये सालाना के बाद अतिरिक्त कमाई का बड़ा हिस्सा अक्सर निवेश और बचत में चला जाता है।
पैकेज बढ़ा तो जिम्मेदारियां और तनाव भी बढ़े
करीब 14 साल के करियर में उन्होंने कई स्तरों पर काम किया। लेकिन उनके अनुभव के मुताबिक, जैसे-जैसे पैकेज बढ़ा, वैसे-वैसे काम का दबाव, जिम्मेदारियां, उम्मीदें और ऑफिस पॉलिटिक्स भी बढ़ती गई।
उनका कहना है कि बड़ा पैकेज निश्चित रूप से आर्थिक सुरक्षा देता है, लेकिन इससे तनाव खत्म नहीं होता। बल्कि कई बार ज्यादा कमाई के साथ ज्यादा चीजें खोने का डर भी पैदा हो जाता है।
अब करोड़ों नहीं, आजादी चाहिए
इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि करोड़ों के पैकेज तक पहुंचने के बाद भी अब इस टेकी का लक्ष्य और ज्यादा सैलरी हासिल करना नहीं है। वह आजादी को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
वायरल पोस्ट के मुताबिक, वह फिलहाल माइक्रो-SaaS प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं और मार्केटिंग सीख रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि अपने बनाए प्रोडक्ट्स से हर महीने करीब 80 हजार से 1.6 लाख रुपये की कमाई शुरू हो जाए। इसके बाद वह नौकरी छोड़ने पर विचार कर सकते हैं।
60 की उम्र में मलाल नहीं चाहते
टेकी की सोच का सबसे बड़ा संदेश यही है कि वह भविष्य में पीछे मुड़कर यह नहीं देखना चाहते कि उन्होंने पूरी जिंदगी सिर्फ किसी और के लिए करोड़ों रुपये कमाने में लगा दी।
उनके मुताबिक, अगर खुद के काम से महीने में करीब एक लाख रुपये भी कमाए जा सकें और उसके साथ समय और आजादी मिले, तो यह करोड़ों के पैकेज से ज्यादा संतोष देने वाला हो सकता है।
कहानी ने छेड़ी नई बहस
इस वायरल कहानी ने सोशल मीडिया पर सफलता, पैसा और खुशी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। क्या ज्यादा सैलरी का मतलब ज्यादा खुशहाल जिंदगी है? या फिर एक ऐसी आय, जिसमें अपनी पसंद की जिंदगी जीने का समय और आजादी मिले, ज्यादा महत्वपूर्ण है?
इस टेकी की कहानी का जवाब शायद यही है कि करियर में बड़ा पैकेज उपलब्धि जरूर हो सकता है, लेकिन असली खुशी हमेशा बड़ी रकम के साथ नहीं आती। कभी-कभी 20 हजार रुपये की पहली बाइक और अपनी मेहनत से हासिल की गई छोटी-सी आजादी भी 1.05 करोड़ के पैकेज से ज्यादा यादगार बन जाती है।

