मेरठ में 17 साल पहले मर चुके चार बच्चों की कराई गई शादी, धूमधाम से हुआ अनोखा आयोजन
मेरठ के खरखौदा क्षेत्र की एक बस्ती में बुधवार को एक ऐसा आयोजन हुआ, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। यहां करीब 17 साल पहले दुनिया से विदा हो चुके चार बच्चों की शादी की रस्में धूमधाम से निभाई गईं। इस अनोखी शादी में दो लड़कियां और दो लड़के शामिल थे। परिवार और समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस आयोजन को पूरा किया।
बताया गया कि इन चारों बच्चों की काफी समय पहले मृत्यु हो गई थी। हालांकि परिवारों की मान्यता और परंपरा के अनुसार उनकी शादी की रस्म पूरी नहीं हो सकी थी। इसी परंपरा को निभाने के लिए वर्षों बाद बुधवार को चारों की प्रतीकात्मक शादी कराई गई।
पूरे रीति-रिवाज से निभाई गई रस्में
इस आयोजन में शादी से जुड़ी कई पारंपरिक रस्में निभाई गईं। परिवार के लोगों और रिश्तेदारों ने इसमें हिस्सा लिया। शादी के दौरान माहौल किसी सामान्य विवाह समारोह जैसा ही नजर आया। लोगों ने अपनी परंपरा के अनुसार रस्मों को पूरा किया और दिवंगत बच्चों के नाम से विवाह की प्रक्रिया संपन्न कराई।
परिजनों का मानना है कि इस तरह की रस्म पूरी करने से वर्षों से अधूरी मानी जा रही परंपरा पूरी होती है। इसी विश्वास के चलते परिवारों ने मिलकर यह आयोजन किया।
इलाके में चर्चा का विषय बनी शादी
खरखौदा की बस्ती में हुई यह शादी आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बन गई। जिन लोगों को इस आयोजन के बारे में जानकारी मिली, वे भी इसे अनोखा बता रहे हैं। कई लोगों के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने दिवंगत बच्चों की शादी की ऐसी रस्म देखी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों में मृत्यु से जुड़ी कई पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ जगहों पर ऐसी परंपराओं के तहत दिवंगत अविवाहित युवक-युवतियों के विवाह की प्रतीकात्मक रस्में कराई जाती हैं।
करीब 17 साल बाद आयोजित इस शादी में परिवार की भावनाएं भी जुड़ी रहीं। परिजनों के लिए यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही मान्यता और अधूरी परंपरा को पूरा करने का अवसर था।
बुधवार को हुए इस आयोजन ने एक बार फिर दिखाया कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में विवाह और मृत्यु से जुड़ी परंपराएं कितनी विविध हैं। खरखौदा की इस अनोखी शादी की चर्चा अब आसपास के क्षेत्रों में भी हो रही है।

