भारत में एलोवेरा का पौधा इतना आम है कि कई घरों में यह आसानी से मिल जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट ने इसी एलोवेरा की कीमत को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है।पोस्ट में दावा किया गया है कि दुबई में एलोवेरा की एक पत्ती करीब 4 दिरहम में बिक रही है, जिसकी भारतीय मुद्रा में कीमत लगभग ₹100 के आसपास बैठती है। यानी जिस पौधे को भारत में लोग घर के गमले या बगीचे में आसानी से उगा लेते हैं, वही चीज विदेश में कीमत के साथ बिकती नजर आ रही है।
बाबा रामदेव ने स्वदेशी और आयुर्वेद को इस स्तर पर पहुंचा दिया है कि इंडिया में घर घर दिखने वाला एलोवेरा दुबई में बिक रहा हैं।
— तेज़ तड़का (@tadka_tez) September 8, 2026
दुबई में इसकी कीमत मात्र 4 दुबई रूपये है जो इंडिया में लगभग 100 रूपये होगी
इस एलोवेरा की एक पत्ती की कीमत बाहर 100 रूपये हैं इंडियन की कीमत कितनी होगी… pic.twitter.com/Hf8lVmpV0F
बाबा रामदेव ने स्वदेशी और आयुर्वेद को इस स्तर पर पहुंचा दिया है कि इंडिया में घर घर दिखने वाला एलोवेरा दुबई में बिक रहा हैं।
— तेज़ तड़का (@tadka_tez) September 8, 2026
दुबई में इसकी कीमत मात्र 4 दुबई रूपये है जो इंडिया में लगभग 100 रूपये होगी
इस एलोवेरा की एक पत्ती की कीमत बाहर 100 रूपये हैं इंडियन की कीमत कितनी होगी… pic.twitter.com/Hf8lVmpV0F
यह उदाहरण सिर्फ एलोवेरा की कीमत का नहीं, बल्कि भारतीय प्राकृतिक संसाधनों और आयुर्वेदिक उत्पादों की संभावनाओं पर भी सवाल खड़ा करता है। भारत में सदियों से एलोवेरा और कई दूसरे औषधीय पौधों का इस्तेमाल होता आया है। ऐसे में सवाल है कि इन प्राकृतिक संसाधनों को बड़े स्तर पर प्रोसेस करके, ब्रांड बनाकर और दुनिया के बाजार तक पहुंचाकर भारत कितना बड़ा बाजार तैयार कर सकता है?
पोस्ट में बाबा रामदेव और स्वदेशी तथा आयुर्वेद को बढ़ावा देने की बात भी कही गई है। हालांकि, वायरल पोस्ट में बताए गए दाम और दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग दुकानों, पैकेजिंग और गुणवत्ता के हिसाब से कीमतों में काफी अंतर हो सकता है।
फिर भी यह सवाल जरूर उठता है कि भारत में आसानी से मिलने वाली चीजें जब विदेशों में मूल्यवर्धित उत्पाद बनकर बिकती हैं, तो भारत में इनके बड़े पैमाने पर उत्पादन, प्रोसेसिंग और निर्यात को और बढ़ावा क्यों न दिया जाए?भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ बड़ी युवा आबादी और विशाल मानव संसाधन भी है। जरूरत है इन्हें सही अवसर, कौशल और बाजार से जोड़ने की।

