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इस शख्स ने शहीदों के नाम कर दिया अपना शरीर, सम्मान में गुदवा लिए 580 जवानों के नाम

इस शख्स ने शहीदों के नाम कर दिया अपना शरीर, सम्मान में गुदवा लिए 580 जवानों के नाम

हम सभी अपने सैनिकों का सम्मान करते हैं, लेकिन कुछ लोग इस सम्मान को अद्वितीय तरीके से व्यक्त करते हैं। गाजियाबाद के एक व्यक्ति, अभिषेक गौतम, ने शहीदों के सम्मान में अपनी शारीरिक कुर्बानी दी है। उन्होंने शहीदों की शहादत को सलाम करने का एक अनोखा तरीका अपनाया है, जिसने सभी को चौंका दिया है।

अभिषेक ने अपनी पूरी बॉडी पर भारतीय सेना के शहीद जवानों के नाम के टैटू बनवाए हैं। ये टैटू न केवल सैनिकों के नाम हैं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाली महान हस्तियों जैसे भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, महात्मा गांधी, और झांसी की रानी लक्ष्मी बाई के चित्र भी हैं। उनका यह कदम एक सशक्त संदेश देता है, जो दर्शाता है कि वे शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत को न केवल याद करते हैं, बल्कि उन्हें सच्चे सम्मान के साथ श्रद्धांजलि भी अर्पित करते हैं।

अभिषेक ने खासतौर पर कारगिल युद्ध में शहीद हुए 580 जवानों के नाम अपने शरीर पर गुदवाए हैं। इसके अलावा, उन्होंने अपनी बॉडी पर इंडिया गेट और शहीद स्मारक जैसे प्रमुख स्थल और 11 स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र भी बनवाए हैं। इन सेनानियों में महाराणा प्रताप, भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, महात्मा गांधी, और अन्य प्रमुख व्यक्ति शामिल हैं जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपनी जान न्योछावर की।

यह कदम अभिषेक ने इस साल, 2018 में उठाया था। लोग अब उन्हें "चलता-फिरता वॉर मेमोरियल" कहकर पुकारते हैं, क्योंकि उनकी बॉडी पर भारतीय इतिहास की वीरता और शौर्य का प्रतीक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। उनके शरीर पर यह टैटू सिर्फ उनके व्यक्तिगत सम्मान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हर उस शहीद के प्रति श्रद्धांजलि भी है जिन्होंने अपनी जान देश के लिए दी।

इसके अलावा, अभिषेक ने शहीदों के परिवारों से भी मुलाकात की है और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि शहीदों की याद को हमेशा जीवित रखना बहुत ज़रूरी है, और इसी उद्देश्य से उन्होंने यह टैटू बनवाए हैं। उनका यह कदम समाज में शहीदों के प्रति सम्मान और प्यार को बढ़ावा देने का एक प्रेरणास्त्रोत बन चुका है।

अभिषेक गौतम का यह कदम न केवल एक व्यक्तिगत श्रद्धांजलि है, बल्कि यह एक उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे हम अपनी शारीरिक और मानसिक शक्तियों का उपयोग दूसरों के सम्मान में कर सकते हैं। उनकी यह पहल अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है, जो शहीदों की शहादत को कभी न भूलने की कसम खाते हैं।

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