Samachar Nama
×

“मौत के बेहद करीब जाकर लौटी ज़िंदगी”: पूर्व NASA और अमेरिकी नेवी वैज्ञानिक का चौंकाने वाला Near Death Experience

“मौत के बेहद करीब जाकर लौटी ज़िंदगी”: पूर्व NASA और अमेरिकी नेवी वैज्ञानिक का चौंकाने वाला Near Death Experience

NASA और अमेरिकी नेवी से जुड़ी रह चुकीं एक पूर्व वैज्ञानिक ने अपने Near Death Experience (मृत्यु के बेहद करीब के अनुभव) को लेकर ऐसा खुलासा किया है, जिसने विज्ञान और जीवन-दर्शन दोनों पर नई बहस छेड़ दी है। वैज्ञानिक का कहना है कि जब वह मौत के बेहद करीब पहुंच गई थीं, उस अनुभव ने उनकी सोच, जीवन के प्रति दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया।

अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि यह घटना उनके जीवन का सबसे असाधारण और अविश्वसनीय क्षण था। एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति के दौरान उनका शरीर लगभग निष्क्रिय अवस्था में चला गया था और उसी दौरान उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे वास्तविक दुनिया से अलग किसी दूसरी अवस्था में पहुंच गई हों।

✨ “मैंने खुद को शरीर से अलग महसूस किया”

वैज्ञानिक के अनुसार, उस दौरान उन्हें अपने शरीर से अलग होने का अनुभव हुआ। उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसा लगा जैसे वे अपने ही शरीर को ऊपर से देख रही हों और आसपास हो रही घटनाओं को एक अलग ही दृष्टिकोण से समझ रही हों। यह अनुभव उनके लिए डराने वाला नहीं बल्कि अत्यंत शांत और सुकून भरा था।

उन्होंने यह भी कहा कि उस क्षण में समय, दर्द और डर का कोई अस्तित्व नहीं था। सब कुछ बेहद शांत और हल्का महसूस हो रहा था। यह अनुभव उनके लिए इतना वास्तविक था कि आज भी वह उसे पूरी तरह एक सपना या भ्रम मानने के बजाय एक गहरा व्यक्तिगत अनुभव मानती हैं।

🌿 जीवन को देखने का नजरिया पूरी तरह बदल गया

मृत्यु के करीब जाकर लौटने के बाद उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया। उन्होंने बताया कि पहले वह अपने करियर, उपलब्धियों और वैज्ञानिक शोधों को ही सबसे महत्वपूर्ण मानती थीं, लेकिन इस अनुभव के बाद उनके लिए जीवन का अर्थ पूरी तरह बदल गया।

अब वह रिश्तों, भावनाओं और मानसिक शांति को अधिक महत्व देती हैं। उनके अनुसार, जीवन केवल उपलब्धियों की दौड़ नहीं है, बल्कि हर पल को महसूस करने और जीने की प्रक्रिया है।

🧠 विज्ञान और आध्यात्म के बीच सवाल

उनका यह अनुभव एक बार फिर विज्ञान और आध्यात्म के बीच चल रही बहस को सामने लाता है। कुछ वैज्ञानिक इसे मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी और न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया मानते हैं, जबकि कई लोग इसे चेतना की एक अलग अवस्था के रूप में देखते हैं।

हालांकि पूर्व वैज्ञानिक खुद इसे पूरी तरह किसी एक सिद्धांत से जोड़कर नहीं देखतीं। उनका कहना है कि विज्ञान अभी भी चेतना और मृत्यु के बाद की स्थिति को पूरी तरह समझने में सक्षम नहीं है।

🌍 “अब मैं हर दिन को अलग तरह से जीती हूँ”

अपने अनुभव के अंत में उन्होंने कहा कि अब वह हर दिन को अधिक जागरूकता और कृतज्ञता के साथ जीती हैं। छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूंढना, लोगों से जुड़ना और मानसिक शांति बनाए रखना उनके जीवन का नया उद्देश्य बन गया है।

उनका Near Death Experience आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और यह सवाल छोड़ जाता है कि क्या मृत्यु वास्तव में अंत है या किसी नई शुरुआत का द्वार।

Share this story

Tags