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मुंबई को छोड़ चुनी पहाड़ों की जिंदगी, पत्नी के साथ नैनीताल में बस गया पायलट, बताया ड्रीम होम बनाने का खर्च

मुंबई को छोड़ चुनी पहाड़ों की जिंदगी, पत्नी के साथ नैनीताल में बस गया पायलट, बताया ड्रीम होम बनाने का खर्च

मुंबई जैसे बड़े शहर की भागदौड़, ट्रैफिक और व्यस्त जीवनशैली को छोड़कर पहाड़ों के बीच सुकून की जिंदगी जीना कई लोगों का सपना होता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए बड़ा फैसला ले लेते हैं। ऐसी ही कहानी राघव शर्मा और उनकी पार्टनर गरिमा बजाज की है। मुंबई में अपना फ्लाइंग करियर शुरू करने वाले राघव ने करीब नौ साल पहले शहर छोड़कर उत्तराखंड के नैनीताल जिले के कोटाबाग में बसने का फैसला किया। अब यह कपल पहाड़ों के बीच रहता है और वहां होमस्टे का कारोबार चलाता है। हाल ही में राघव ने पहाड़ों में अपना ड्रीम होम बनाने की लागत भी बताई है। 

मुंबई की जिंदगी छोड़कर क्यों पहुंचे पहाड़ों में?

राघव ने मुंबई में अपना काफी समय बिताया। वहीं उनकी पढ़ाई हुई और उन्होंने फ्लाइंग की ट्रेनिंग भी ली। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन में बदलाव करने का फैसला किया। राघव ऐसी जिंदगी चाहते थे, जिसमें प्रकृति उनके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हो और उन्हें शहर की भागदौड़ से दूर रहने का मौका मिले।

उत्तराखंड के कोटाबाग में शिफ्ट होने के बाद उन्होंने ऑर्गेनिक खेती से शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में कदम रखा और होमस्टे का कारोबार शुरू किया। अब वह और गरिमा यहां तीन होमस्टे चलाते हैं। इस तरह उन्होंने अपनी पसंद की जीवनशैली के साथ कमाई का जरिया भी तैयार किया है। 

पहाड़ों में ड्रीम होम बनाने में कितना खर्च?

राघव ने अपने एक वीडियो में बताया कि पहाड़ों में घर बनाने का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की निर्माण सामग्री और तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। पारंपरिक ईंट या पत्थर से घर बनाया जा सकता है। इसके अलावा प्रीफैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर और मिट्टी, चूना तथा पुआल जैसी प्राकृतिक निर्माण सामग्री के विकल्प भी मौजूद हैं।

राघव के मुताबिक, मोटे तौर पर घर बनाने के लिए प्रति वर्ग फीट 2,500 से 3,000 रुपये का बजट मानकर चल सकते हैं।

इस हिसाब से 1,000 वर्ग फीट का घर बनाने में करीब 25 लाख से 30 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं। यह अनुमान निर्माण की लागत पर आधारित है। जमीन की कीमत, जगह तक सामग्री पहुंचाने का खर्च, अनुमति, फर्नीचर और अन्य सुविधाओं के कारण कुल बजट अलग हो सकता है। 

मिट्टी का घर बनाने में भी है दिलचस्पी

राघव और गरिमा की दिलचस्पी केवल पहाड़ों में रहने तक सीमित नहीं है। वे प्राकृतिक निर्माण सामग्री के इस्तेमाल में भी रुचि रखते हैं। राघव ने बताया कि वह मिट्टी का घर बनाने की तकनीक सीखने के लिए 14 दिन की कार्यशाला में शामिल होने की योजना बना रहे थे। उनका इरादा आगे चलकर प्राकृतिक सामग्री से अपना कॉटेज बनाने का भी है। 

पहाड़ों में रहने के लिए कमाई का जरिया जरूरी

राघव और गरिमा की कहानी उन लोगों को आकर्षित कर सकती है, जो शहर छोड़कर प्रकृति के करीब बसना चाहते हैं। लेकिन पहाड़ों में जीवन बिताने के लिए केवल खूबसूरत नजारे ही काफी नहीं हैं। स्वास्थ्य सुविधाएं, इंटरनेट कनेक्टिविटी, परिवहन, निर्माण सामग्री की उपलब्धता और नियमित आय जैसे पहलुओं पर भी विचार करना जरूरी है।

राघव का सफर दिखाता है कि जीवनशैली में बदलाव के साथ कमाई का टिकाऊ साधन बनाना भी अहम है। उनका उदाहरण यह भी बताता है कि पहाड़ों में घर बनाने से पहले बजट, स्थानीय परिस्थितियों और निर्माण के तरीकों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।

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