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दिल्ली में रहकर बेंगलुरु में नौकरी! हर दूसरे हफ्ते फ्लाइट से ऑफिस जाने का आइडिया, खर्च जानकर चौंक जाएंगे
 

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वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड वर्किंग के दौर में लोग नौकरी और रहने की जगह को लेकर नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसा ही एक अनोखा मामला चर्चा में है, जहां एक व्यक्ति दिल्ली में रहकर बेंगलुरु की कंपनी में नौकरी करने का प्लान बना रहा है। खास बात यह है कि वह हर दूसरे हफ्ते फ्लाइट से बेंगलुरु जाकर ऑफिस से काम करने की योजना पर विचार कर रहा है।

दिल्ली में रहना, बेंगलुरु में ऑफिस

इस आइडिया के पीछे वजह भी दिलचस्प है। बेंगलुरु में ऑफिस होने के बावजूद कर्मचारी दिल्ली में रहना चाहता है। हाइब्रिड वर्क मॉडल के तहत अगर हर दिन ऑफिस जाना जरूरी नहीं है, तो वह बाकी दिनों में दिल्ली से काम कर सकता है और निर्धारित ऑफिस दिनों में बेंगलुरु पहुंच सकता है।

ऐसे मॉडल में कर्मचारी को हर महीने कई बार दिल्ली और बेंगलुरु के बीच यात्रा करनी होगी।

हर दूसरे हफ्ते फ्लाइट से सफर

अगर महीने में दो बार बेंगलुरु जाना हो और हर बार दिल्ली से बेंगलुरु की आने-जाने की फ्लाइट लेनी पड़े, तो यात्रा का खर्च काफी बढ़ सकता है। इसके अलावा एयरपोर्ट तक आने-जाने, बेंगलुरु में ठहरने और खाने-पीने का खर्च भी इसमें जुड़ जाएगा।

मान लीजिए महीने में दो राउंड ट्रिप करनी पड़ती हैं, तो केवल हवाई टिकट का खर्च ही हजारों रुपए तक पहुंच सकता है। टिकट की कीमत यात्रा की तारीख, बुकिंग कितने दिन पहले की गई है और एयरलाइन पर निर्भर करेगी।

होटल का खर्च भी जोड़ना होगा

फ्लाइट के अलावा ऑफिस विजिट के दौरान बेंगलुरु में ठहरने का खर्च भी महत्वपूर्ण होगा। यदि कर्मचारी हर बार एक-दो रात होटल में रुकता है, तो महीने के कुल खर्च में इसका बड़ा हिस्सा जुड़ सकता है।

इसके अलावा कैब, खाना और अन्य छोटे खर्च मिलाकर दिल्ली से बेंगलुरु आने-जाने का मासिक बजट काफी बढ़ सकता है।

क्या किराए के घर से सस्ता पड़ेगा?

इस तरह की नौकरी में सबसे बड़ा सवाल यही है कि हर महीने फ्लाइट और होटल पर खर्च करना बेंगलुरु में किराए पर रहने से कितना अलग पड़ेगा। अगर ऑफिस विजिट महीने में सिर्फ एक-दो बार हो और कंपनी यात्रा का खर्च वहन करे, तो यह मॉडल कर्मचारी के लिए सुविधाजनक हो सकता है।

लेकिन अगर पूरा यात्रा और ठहरने का खर्च कर्मचारी को खुद उठाना पड़े, तो लंबी अवधि में यह व्यवस्था महंगी साबित हो सकती है।

हाइब्रिड जॉब में बढ़ रहा है ऐसे विकल्पों का चलन

हाइब्रिड वर्किंग ने कर्मचारियों को अपने ऑफिस से अलग शहर में रहने का विकल्प दिया है। हालांकि यह पूरी तरह कंपनी की वर्क-पॉलिसी, ऑफिस में अनिवार्य उपस्थिति और कर्मचारी के यात्रा बजट पर निर्भर करता है। दिल्ली-बेंगलुरु जैसे लंबे रूट पर बार-बार फ्लाइट लेने से पहले टिकट, होटल, स्थानीय यात्रा और समय—चारों का हिसाब लगाना जरूरी है।

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