टोक्यो ओलंपिक 2020 में जापान ने सिर्फ शानदार खेल आयोजन ही नहीं किया था, बल्कि मेडल तैयार करने के लिए भी एक अनोखी पहल की थी। जापान ने पुराने मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कबाड़ मानने के बजाय उनमें मौजूद कीमती धातुओं को निकालकर ओलंपिक और पैरालंपिक मेडल तैयार किए थे। इस पहल के तहत देशभर के लोगों से पुराने मोबाइल फोन और छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण इकट्ठा किए गए।
जापान के इस प्रोजेक्ट को ‘Tokyo 2020 Medal Project’ नाम दिया गया था। इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे से सोना, चांदी और कांसा जैसी धातुओं को निकालकर उनका दोबारा इस्तेमाल करना था। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस अभियान में करीब 6.21 मिलियन यानी 62.1 लाख पुराने मोबाइल फोन इकट्ठा किए गए। इसके अलावा करीब 78,985 टन छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जुटाए गए।
इन पुराने मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सीधे मेडल में नहीं बदला गया। पहले उन्हें रिसाइकिलिंग प्रक्रिया से गुजारा गया। अलग-अलग उपकरणों में मौजूद धातुओं को निकालकर उन्हें अलग किया गया और फिर शुद्ध किया गया। इस प्रक्रिया से करीब 32 किलो सोना, 3,500 किलो चांदी और 2,200 किलो कांसा प्राप्त हुआ। इन्हीं रिसाइकिल की गई धातुओं का इस्तेमाल करीब 5,000 ओलंपिक और पैरालंपिक मेडल तैयार करने में किया गया।
इस पूरे अभियान में जापान के आम नागरिकों की भी बड़ी भूमिका रही। लोगों ने अपने पुराने मोबाइल फोन, कैमरा, लैपटॉप, गेमिंग डिवाइस और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान दान किए। मोबाइल फोन जमा करने के लिए देशभर में कलेक्शन सेंटर बनाए गए थे। NTT Docomo के स्टोर भी इस अभियान का हिस्सा बने और बड़ी संख्या में लोगों ने वहां अपने पुराने फोन जमा किए।
इस पहल के पीछे सिर्फ मेडल तैयार करना ही उद्देश्य नहीं था। जापान ने इसे पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल से भी जोड़ा। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में मौजूद कीमती धातुओं को दोबारा इस्तेमाल करके यह संदेश देने की कोशिश की गई कि पुराने और बेकार सामान में भी उपयोगी संसाधन मौजूद हो सकते हैं।
टोक्यो 2020 के मेडल का डिजाइन भी खास था। मेडल की सतह पर कई छोटे-छोटे गोलाकार पैटर्न बनाए गए थे, जो प्रकाश पड़ने पर अलग तरह से चमकते थे। आयोजकों के अनुसार डिजाइन का उद्देश्य विविधता और दुनिया भर के खिलाड़ियों की मेहनत को सम्मान देने की भावना को दर्शाना था।
जापान की इस पहल की खास बात यह रही कि मेडल बनाने की प्रक्रिया में देशभर के आम लोगों को सीधे जोड़ा गया। यानी जिन लोगों ने अपने पुराने फोन और इलेक्ट्रॉनिक सामान दिए, उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से ओलंपिक की तैयारियों में योगदान दिया।
टोक्यो 2020 का यह प्रयोग आज भी ई-वेस्ट यानी इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण का चर्चित उदाहरण है। जापान ने दिखाया कि सही तकनीक और सामूहिक भागीदारी के जरिए पुराने इलेक्ट्रॉनिक सामान से मूल्यवान संसाधन निकाले जा सकते हैं। 62 लाख से ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर तैयार किए गए ये मेडल खेलों के साथ-साथ पर्यावरण और रिसाइक्लिंग की दिशा में भी एक अलग संदेश छोड़ गए।

