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हाई-राइज फ्लैट्स में बढ़ रही है ‘अकेलेपन’ की दीवार? 4 साल तक पड़ोसी से बात न होने पर महिला का छलका दर्द

हाई-राइज फ्लैट्स में बढ़ रही है ‘अकेलेपन’ की दीवार? 4 साल तक पड़ोसी से बात न होने पर महिला का छलका दर्द

तेजी से बदलती शहरी जिंदगी में ऊंची-ऊंची इमारतें और लग्जरी हाई-राइज फ्लैट्स आधुनिक जीवनशैली की पहचान बन चुके हैं। शानदार सुविधाएं, सिक्योरिटी और प्राइवेसी के बावजूद अब इन्हीं अपार्टमेंट्स को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है — क्या हाई-राइज फ्लैट्स लोगों को सामाजिक रूप से अकेला बना रहे हैं?

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक महिला की पोस्ट ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया। महिला ने बताया कि वह पिछले 4 साल से एक हाई-राइज अपार्टमेंट में रह रही हैं, लेकिन आज तक उनकी अपने पड़ोसियों से ठीक से बातचीत तक नहीं हुई। उन्होंने लिखा कि एक ही बिल्डिंग में रहने के बावजूद लोग एक-दूसरे से पूरी तरह कट चुके हैं।

महिला की यह पोस्ट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गई और हजारों लोगों ने इससे खुद को जुड़ा हुआ महसूस किया। कई यूजर्स ने माना कि आधुनिक अपार्टमेंट संस्कृति में लोग अपने-अपने घरों तक सीमित होकर रह गए हैं। पहले जहां मोहल्लों में पड़ोसी परिवार जैसा रिश्ता रखते थे, वहीं अब लोग सामने रहने वाले व्यक्ति का नाम तक नहीं जानते।

“एक ही बिल्डिंग में अजनबी जैसे लोग”

महिला ने अपने पोस्ट में लिखा कि हाई-राइज सोसायटी में रहने के बावजूद उन्हें कभी ‘कम्युनिटी’ जैसा एहसास नहीं हुआ। लिफ्ट में लोग नजरें चुराकर मोबाइल देखने लगते हैं और बातचीत सिर्फ “हैलो” तक सीमित रह जाती है। उन्होंने कहा कि कई बार त्योहार और छुट्टियों के दिन भी बेहद अकेले गुजरते हैं।

उनकी इस बात से बड़ी संख्या में लोग सहमत नजर आए। कुछ यूजर्स ने लिखा कि बड़े शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास रिश्तों के लिए समय ही नहीं बचा है। वहीं कुछ लोगों ने इसे “अर्बन लोनलीनेस” यानी शहरी अकेलेपन की समस्या बताया।

क्यों बढ़ रहा है अकेलापन?

विशेषज्ञों का मानना है कि हाई-राइज फ्लैट्स में प्राइवेसी तो ज्यादा होती है, लेकिन सामाजिक जुड़ाव कम हो जाता है। पहले लोग घरों के बाहर बैठकर बातचीत करते थे, बच्चे साथ खेलते थे और पड़ोसियों के बीच अपनापन होता था। लेकिन अब डिजिटल लाइफस्टाइल और व्यस्त दिनचर्या ने लोगों को सीमित कर दिया है।

इसके अलावा Work From Home कल्चर और सोशल मीडिया पर बढ़ती निर्भरता भी वास्तविक सामाजिक रिश्तों को कमजोर कर रही है। लोग ऑनलाइन ज्यादा जुड़े हैं, लेकिन आसपास रहने वाले लोगों से दूरी बढ़ती जा रही है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर

मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक, लंबे समय तक सामाजिक अलगाव इंसान के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। अकेलापन तनाव, चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। खासतौर पर बड़े शहरों में रहने वाले युवा और अकेले रहने वाले लोग इस समस्या का ज्यादा सामना कर रहे हैं।

क्या हो सकता है समाधान?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोसायटी में रहने वाले लोगों को छोटी-छोटी बातचीत की शुरुआत करनी चाहिए। त्योहार, कम्युनिटी इवेंट्स और ग्रुप एक्टिविटीज लोगों को करीब ला सकती हैं। एक साधारण मुस्कान या बातचीत भी रिश्तों की शुरुआत बन सकती है।

महिला की वायरल पोस्ट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आधुनिक सुविधाओं से भरी जिंदगी में क्या इंसान भावनात्मक रूप से अकेला होता जा रहा है। शायद ऊंची इमारतों के बीच अब रिश्तों की गर्माहट तलाशने की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस हो रही ह

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