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''क्या हिंदू क्या मुस्लिम'' राजस्थान के ऐसे लोक देवता जिनके आगे सभी धर्म के लोग झुकाते है शीश, पूजा से होती है भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण

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राजस्थान की धरती सिर्फ वीरों और महापुरुषों के लिए ही नहीं जानी जाती, बल्कि यहां की मिट्टी में बसे हैं ऐसे लोक देवता, जो ना सिर्फ हिंदुओं के, बल्कि मुस्लिम समाज के लोगों के लिए भी आस्था और श्रद्धा का केंद्र हैं। ऐसा ही एक नाम है – बाबा रामदेव पीर, जिनका दरबार जैसलमेर जिले के रामदेवरा गांव में स्थित है।

बाबा रामदेव का जीवन और शिक्षाएं आज भी इंसानियत का प्रतीक हैं। वे कहते थे – "इंसान सबसे बड़ा धर्म है" और यही कारण है कि उनके दरबार में ना कोई धर्म की दीवार है, ना जात-पात का भेदभाव।

हिंदू भी झुकता है, मुस्लिम भी सजदा करता है

बाबा रामदेव को हिंदू धर्म में एक अवतारी पुरुष माना जाता है, वहीं मुस्लिम समाज उन्हें "रामसा पीर" के नाम से याद करता है। कहा जाता है कि बाबा रामदेव के चमत्कारों से प्रभावित होकर अजमेर से पांच पीर उनसे मिलने आए थे। बाबा की आध्यात्मिक शक्ति को देखकर वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने बाबा को 'पीर' की उपाधि दी और उनके अनुयायी बन गए।

आज भी बाबा रामदेव के दरबार में हिंदू भक्त अगर माथा टेकते हैं तो मुस्लिम समुदाय के लोग भी चादर चढ़ाकर और नमाज़ अदा कर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।

रामदेवरा में होती है धर्मों की एकता की मिसाल

हर साल रामदेवरा मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु देशभर से आते हैं। इस मेले में जितनी आस्था देखने को मिलती है, उतनी ही धर्मों की एकता भी महसूस होती है। पैदल यात्री, झांकियां, लोक गीत, भजन, और दरगाही कलाम – सब एक साथ गूंजते हैं बाबा के नाम पर।

हर मनोकामना होती है पूर्ण

भक्तों का विश्वास है कि बाबा रामदेव के दरबार में सच्चे मन से जो भी मुराद मांगी जाती है, वह अवश्य पूरी होती है। नौकरी, संतान, बीमारी, शादी, व्यापार—हर क्षेत्र में लोगों ने बाबा के चमत्कार अनुभव किए हैं। मनोकामना पूरी होने पर लोग कपड़े के घोड़े, चादर, प्रसाद, और ध्वजा चढ़ाते हैं।

संदेश: मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है

बाबा रामदेव की सबसे बड़ी सीख यही थी कि कोई धर्म बड़ा या छोटा नहीं होता, सबसे बड़ा धर्म है मानवता। और यही कारण है कि उनके दरबार में आज भी हिंदू हो या मुस्लिम, सब एक ही कतार में खड़े होकर बाबा को प्रणाम करते हैं।

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