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भारत की वो इकलौती, जिसका पानी 3 दिन के लिए हो जाता है लाल, आस्था-विज्ञान में छिपी है वजह
 

भारत की वो इकलौती, जिसका पानी 3 दिन के लिए हो जाता है लाल, आस्था-विज्ञान में छिपी है वजह

भारत नदियों का देश है और यहां हर नदी की अपनी अलग कहानी, परंपरा और धार्मिक मान्यता है। लेकिन क्या आपने ऐसी नदी के बारे में सुना है, जिसका पानी हर साल कुछ समय के लिए लाल हो जाता है? असम की ब्रह्मपुत्र नदी से जुड़ा यह रहस्य लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा है। खास तौर पर गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर से जुड़ी अंबुबाची मेले की परंपरा के दौरान नदी के पानी के लाल दिखाई देने की बात कही जाती है।

तीन दिन तक क्यों लाल दिखता है पानी?

कामाख्या मंदिर में हर साल अंबुबाची मेला आयोजित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान देवी कामाख्या को वार्षिक रजस्वला होने की मान्यता है। इसी वजह से मंदिर के कपाट कुछ समय के लिए बंद रहते हैं। मान्यता है कि इन दिनों धरती भी रजस्वला होती है और प्रकृति की उर्वरता का यह पर्व मनाया जाता है।

इसी धार्मिक परंपरा के कारण मंदिर से जुड़ी कई कहानियों में ब्रह्मपुत्र के पानी के लाल होने का भी उल्लेख मिलता है। भक्त इसे देवी की शक्ति और आस्था से जोड़कर देखते हैं।

विज्ञान क्या कहता है?

हालांकि नदी के पानी के लाल होने की वजह को लेकर वैज्ञानिक नजरिया धार्मिक मान्यता से अलग है। विशेषज्ञों के मुताबिक पानी के रंग में बदलाव के पीछे प्राकृतिक कारण हो सकते हैं। मानसून के दौरान नदी में मिट्टी, जैविक पदार्थ और अलग-अलग खनिजों का बहाव बढ़ जाता है। इससे पानी का रंग सामान्य दिनों की तुलना में अलग दिखाई दे सकता है।

इसके अलावा नदी और आसपास के जलस्रोतों में मौजूद सूक्ष्मजीव तथा शैवाल भी पानी के रंग को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि पानी के लाल होने की सटीक वजह किसी एक घटना से जोड़ना आसान नहीं है और इसके लिए स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक जांच और जल के नमूनों का अध्ययन जरूरी होता है।

आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम

अंबुबाची मेले के दौरान देशभर से श्रद्धालु कामाख्या मंदिर पहुंचते हैं। यह पर्व देवी की शक्ति और स्त्रीत्व से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के लिए खास माना जाता है। मंदिर के कपाट बंद रहने के दौरान भी श्रद्धालुओं की आस्था बनी रहती है और कपाट दोबारा खुलने पर विशेष पूजा-अनुष्ठान किए जाते हैं।

यही वजह है कि ब्रह्मपुत्र और कामाख्या मंदिर से जुड़ी यह घटना केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि लोगों की वैज्ञानिक जिज्ञासा भी बढ़ाती है।

क्या सच में नदी तीन दिन तक लाल रहती है?

यहां यह समझना जरूरी है कि ब्रह्मपुत्र का पूरा जलक्षेत्र हर साल तीन दिनों तक एक समान लाल हो जाता है—ऐसा दावा वैज्ञानिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं है। पानी का रंग स्थानीय परिस्थितियों, मौसम, मिट्टी और अन्य पर्यावरणीय कारकों के आधार पर बदल सकता है।

इसलिए इसे एक रहस्य या चमत्कार मानने के बजाय आस्था, स्थानीय परंपरा और प्राकृतिक घटनाओं के संगम के रूप में देखना ज्यादा उचित है। कामाख्या और ब्रह्मपुत्र से जुड़ी यह परंपरा आज भी भारत की उन अनोखी सांस्कृतिक कहानियों में शामिल है, जहां प्रकृति और आस्था एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी दिखाई देती हैं।

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