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अफगानिस्तान के लाजावर्त पत्थर से बनेगा देश का पहला नीला शिवलिंग, ग्वालियर में तैयार हो रहीं अनूठी मूर्तियां

अफगानिस्तान के लाजावर्त पत्थर से बनेगा देश का पहला नीला शिवलिंग, ग्वालियर में तैयार हो रहीं अनूठी मूर्तियां

ग्वालियर में इन दिनों एक अनोखी धार्मिक कलाकृति तैयार की जा रही है, जो अपनी खास बनावट और रंग के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अफगानिस्तान से लाए गए दुर्लभ लाजावर्त पत्थर से देश का पहला नीला शिवलिंग तैयार किए जाने की बात सामने आई है। इसके साथ ही इसी विशेष पत्थर से भगवान शिव की अन्य मूर्तियां भी तैयार की जा रही हैं। पत्थर की गहरी नीली चमक और प्राकृतिक बनावट इन मूर्तियों को बेहद खास रूप दे रही है।

लाजावर्त को आमतौर पर लैपिस लाजुली के नाम से भी जाना जाता है। यह अपने गहरे नीले रंग के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसमें प्राकृतिक रूप से दिखाई देने वाली चमक और अलग-अलग रंगों की महीन धारियां इसे दूसरे पत्थरों से अलग बनाती हैं। इसी खासियत के कारण प्राचीन समय से ही इसका इस्तेमाल आभूषणों, सजावटी वस्तुओं और कलाकृतियों में किया जाता रहा है।

बताया जा रहा है कि ग्वालियर में कारीगर इस पत्थर को बेहद सावधानी से तराशकर शिवलिंग का आकार दे रहे हैं। पत्थर की प्राकृतिक संरचना को ध्यान में रखते हुए इसकी कटिंग और पॉलिशिंग की जा रही है, ताकि उसकी मूल चमक और रंग बरकरार रहे। एक छोटी सी गलती से महंगा और दुर्लभ पत्थर खराब हो सकता है, इसलिए मूर्तिकारों को बेहद बारीकी से काम करना पड़ रहा है।

इस परियोजना की खासियत सिर्फ शिवलिंग का नीला रंग नहीं है। इसे तैयार करने के लिए जिस लाजावर्त पत्थर का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह अपनी भौगोलिक उत्पत्ति और ऐतिहासिक महत्व के कारण भी खास माना जाता है। अफगानिस्तान का लाजावर्त लंबे समय से अपनी उच्च गुणवत्ता और गहरे नीले रंग के लिए जाना जाता है।

ग्वालियर में तैयार हो रही इन मूर्तियों में पारंपरिक शिल्प और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। कारीगर पहले पत्थर को आवश्यक आकार देते हैं और इसके बाद उसकी सतह को बारीकी से तराशकर चिकना किया जाता है। अंतिम चरण में पॉलिशिंग के जरिए पत्थर की प्राकृतिक चमक को उभारा जाता है।

इस अनूठे शिवलिंग को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भी उत्सुकता देखने को मिल रही है। लोगों के लिए यह इसलिए भी खास है क्योंकि सामान्य तौर पर शिवलिंग अलग-अलग प्रकार के पत्थरों से बनाए जाते हैं, जबकि गहरे नीले रंग के लाजावर्त से तैयार होने वाला शिवलिंग अपनी तरह का अलग उदाहरण माना जा रहा है।

कारीगरों का कहना है कि ऐसे दुर्लभ पत्थर पर काम करने के लिए अनुभव और धैर्य दोनों जरूरी हैं। पत्थर की प्राकृतिक बनावट को नुकसान पहुंचाए बिना उसे धार्मिक मूर्ति का रूप देना चुनौतीपूर्ण काम है। यही कारण है कि निर्माण प्रक्रिया में काफी सावधानी बरती जा रही है।

ग्वालियर में तैयार हो रही ये अनूठी मूर्तियां धार्मिक आस्था के साथ भारतीय शिल्पकला की विविधता को भी दर्शाती हैं। अफगानिस्तान के लाजावर्त पत्थर की प्राकृतिक खूबसूरती और भारतीय कारीगरों की कला का यह मेल आने वाले समय में लोगों के आकर्षण का केंद्र बन सकता है। देश का पहला नीला शिवलिंग तैयार होने की खबर ने इस अनोखी कलाकृति को लेकर उत्सुकता और बढ़ा दी है।

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