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इन देशों में कुंवारे लोगों को देना पड़ता था टैक्स, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान...

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दुनियाभर की सरकारें अपने नागरिकों पर विभिन्न प्रकार के टैक्स लगाकर राजस्व अर्जित करती हैं, ताकि देश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आधारभूत संरचनाओं जैसी सुविधाओं को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके। टैक्स की यह व्यवस्था आमतौर पर लोगों की आय, संपत्ति या उपभोग पर आधारित होती है, लेकिन इतिहास में कई ऐसे भी उदाहरण मिलते हैं जब कुछ सरकारों ने बेहद अजीब और अनोखे टैक्स लगाए। इन्हीं में से एक है बैचलर टैक्स—एक ऐसा कर जो विशेष रूप से कुंवारे लोगों पर लगाया गया था।

अमेरिका में भी लगाया गया था कुंवारों पर टैक्स

अमेरिका के मिसूरी राज्य में 1821 में एक अनोखा टैक्स लागू किया गया था। इस टैक्स के तहत राज्य के सभी अविवाहित पुरुषों को सरकार को 1 डॉलर का भुगतान करना पड़ता था। यह राशि सुनने में मामूली लग सकती है, लेकिन उस समय यह रकम काफी मायने रखती थी। इस टैक्स को लगाने के पीछे सरकार का उद्देश्य था लोगों को शादी के लिए प्रेरित करना और सामाजिक स्थिरता को बढ़ावा देना। माना जाता है कि सरकार को लगता था कि शादीशुदा व्यक्ति समाज के लिए अधिक जिम्मेदार और उपयोगी होता है।

प्राचीन रोम में भी था बैचलर टैक्स

यह अनोखी परंपरा सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं थी। प्राचीन रोम में भी ऐसा ही टैक्स लगाया गया था। 9वीं सदी में सम्राट ऑगस्टस ने यह कानून लागू किया, जिसमें न केवल कुंवारे पुरुषों बल्कि उन विवाहित जोड़ों से भी टैक्स वसूला जाता था जो कि निसंतान थे। इस नियम का उद्देश्य था जनसंख्या में वृद्धि को बढ़ावा देना और रोम की ताकत को बनाए रखना। बताया जाता है कि इस टैक्स के चलते कई लोग विवाह और संतानोत्पत्ति की ओर प्रेरित हुए, जिससे राज्य को राजस्व में भी अच्छा लाभ मिला।

इटली में मुसोलिनी का बैचलर टैक्स

1927 में इटली के तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी ने भी इसी तरह का एक कर लागू किया। उन्होंने एक राष्ट्रवादी नीति के तहत बैचलर टैक्स को लागू किया, जिसका मकसद था इटली की जनसंख्या को बढ़ाना और शादी को सामाजिक दायित्व के रूप में प्रस्तुत करना। मुसोलिनी का मानना था कि एक मजबूत राष्ट्र के लिए बड़ी जनसंख्या जरूरी है, और इसलिए कुंवारे लोगों से यह कर वसूला गया। इस नीति से सरकार को आर्थिक लाभ तो हुआ ही, साथ ही सामाजिक संरचना को एक दिशा देने का प्रयास भी किया गया।

इंग्लैंड और फ्रांस के युद्ध के दौरान भी लगा था टैक्स

1695 में इंग्लैंड और फ्रांस के बीच चल रहे युद्ध के दौरान इंग्लैंड की सरकार ने भी कुंवारे पुरुषों पर टैक्स लगाने का निर्णय लिया। युद्ध की वजह से देश की आर्थिक स्थिति डगमगा रही थी और सरकार को अपनी सैन्य गतिविधियों के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत थी। ऐसे में बैचलर टैक्स एक आसान और त्वरित उपाय के रूप में सामने आया। इस टैक्स से सरकार को कुछ हद तक राहत मिली और युद्धकालीन खर्चों में मदद भी हुई।

कैलिफॉर्निया में प्रस्ताव तो आया, पर लागू नहीं हो सका

1934 में अमेरिका के कैलिफॉर्निया राज्य में भी बैचलर टैक्स लगाने का प्रस्ताव सामने आया था। इसमें 25 डॉलर का टैक्स कुंवारे लोगों से वसूलने की बात की गई थी। इस प्रस्ताव का उद्देश्य था गिरती हुई जनसंख्या दर को काबू में लाना और लोगों को शादी के लिए प्रोत्साहित करना। हालांकि, उस समय राजनीतिक और सामाजिक विरोध के चलते यह टैक्स कभी लागू नहीं हो पाया

क्यों लगाए जाते थे ऐसे टैक्स?

बैचलर टैक्स जैसी नीतियों के पीछे कई तरह की सोच होती थी:

  • जनसंख्या वृद्धि को बढ़ावा देना

  • सामाजिक स्थिरता को सुनिश्चित करना

  • राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संसाधनों की जरूरत

  • शादी और पारिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देना

इनमें से कई टैक्स आज के समय में असंवैधानिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ माने जाते हैं, लेकिन उस समय इन्हें सरकारें एक सामाजिक साधन के रूप में देखती थीं।

निष्कर्ष

भले ही आज के युग में बैचलर टैक्स का विचार हमें हास्यास्पद या असंगत लगे, लेकिन इतिहास में यह एक गंभीर नीति के रूप में अपनाया गया था। अलग-अलग देशों में अलग-अलग समय पर लागू इस टैक्स से यह स्पष्ट होता है कि समाज और सरकारें समय-समय पर अपनी जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार कर व्यवस्था में बदलाव करती रही हैं। बैचलर टैक्स उन्हीं प्रयोगों का एक उदाहरण है—जो आज भले ही इतिहास बन चुका है, लेकिन चर्चा का विषय जरूर है।

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