बच्चों को बचाना है तो ये वीडियो जरूर देखें, ‘प्यार’ के नाम पर हो सकता है बड़ा खेल!
बच्चों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता के लिए एक बार फिर सतर्क रहने की जरूरत है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में पुलिस से जुड़ी एक महिला इन्फ्लुएंसर ने कथित तौर पर एक ऐसे मामले का जिक्र किया, जिसमें एक नाबालिग लड़की एक काफी उम्रदराज व्यक्ति के संपर्क में आ गई थी। लड़की उस व्यक्ति के साथ अपने रिश्ते को प्यार समझ रही थी, लेकिन मामले की गंभीरता सामने आने के बाद इसे बाल सुरक्षा के नजरिए से देखा गया।
यह इंफ्लुएंसर नीतू, जो पुलिस मे है, जिनकी वीडियो हर माता-पिता और समाज के सजग नागरिक के लिए एक बड़ा 'वेक-अप कॉल' है।
— Vishal M. Yadav (@VishalMYadav_) September 28, 2026
एक दिन वह हेल्पडेस्क पर बैठी थी, तो इनको एक माँ अपनी 15 साल की बेटी के साथ मिली,
इन्होंने पूछा क्या हेल्प कर सकती हूँ आपकी, महिला बड़े भारी मन से बोली, ये मेरी… pic.twitter.com/XWZnKtJaFf
यह इंफ्लुएंसर नीतू, जो पुलिस मे है, जिनकी वीडियो हर माता-पिता और समाज के सजग नागरिक के लिए एक बड़ा 'वेक-अप कॉल' है।
— Vishal M. Yadav (@VishalMYadav_) September 28, 2026
एक दिन वह हेल्पडेस्क पर बैठी थी, तो इनको एक माँ अपनी 15 साल की बेटी के साथ मिली,
इन्होंने पूछा क्या हेल्प कर सकती हूँ आपकी, महिला बड़े भारी मन से बोली, ये मेरी… pic.twitter.com/XWZnKtJaFf
बताया गया कि एक मां अपनी 15 वर्षीय बेटी को लेकर मदद के लिए पहुंची थी। महिला ने बताया कि उसकी बेटी गर्भवती है। इसके बाद लड़की से अलग से बात की गई तो उसने कथित तौर पर बताया कि एक 26 वर्षीय व्यक्ति उसे रिक्शे से लाने-ले जाने लगा था और दोनों के बीच बातचीत होती थी।
मामले में लड़की ने उस व्यक्ति के प्रति अपनी भावनाओं को प्यार के तौर पर बताया। लेकिन किसी नाबालिग और वयस्क के बीच यौन संबंध या यौन शोषण से जुड़ा मामला बेहद गंभीर कानूनी विषय है। भारत में POCSO Act के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को बच्चा माना जाता है और बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए विशेष कानूनी प्रावधान हैं।
जिसे बच्चा प्यार समझ रहा हो, उसमें खतरे के संकेत भी हो सकते हैं
बाल सुरक्षा विशेषज्ञों के संदर्भ में 'गूमिंग' शब्द का इस्तेमाल उन परिस्थितियों के लिए किया जाता है, जहां कोई व्यक्ति बच्चे का भरोसा हासिल करके उसे धीरे-धीरे ऐसे व्यवहार या संपर्क की ओर ले जाता है जो उसके लिए नुकसानदायक हो सकता है।यह हमेशा अचानक नहीं होता। कभी दोस्ती, लगातार बातचीत, भावनात्मक सहारा या विशेष ध्यान देने से बच्चे का भरोसा जीता जा सकता है। इसी वजह से माता-पिता के लिए बच्चे के व्यवहार में अचानक आए बदलावों पर ध्यान देना जरूरी है।
माता-पिता इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
अगर बच्चा अचानक किसी व्यक्ति से बहुत ज्यादा जुड़ने लगे, किसी खास व्यक्ति से बातचीत छिपाने लगे या उसके व्यवहार में अचानक बड़ा बदलाव दिखाई दे तो माता-पिता को शांत तरीके से उससे बातचीत करनी चाहिए।बच्चे से सवाल पूछते समय उसे डराने या डांटने के बजाय ऐसा माहौल बनाना जरूरी है, जिसमें वह बिना डर अपनी बात बता सके। खासकर ऑनलाइन चैट, सोशल मीडिया और फोन के इस्तेमाल को लेकर बच्चों से लगातार खुलकर बातचीत करना जरूरी है।
कानून नाबालिगों को विशेष सुरक्षा देता है
POCSO Act के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा दी गई है। कानून में यौन उत्पीड़न और अन्य यौन अपराधों के लिए प्रावधान हैं तथा ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग भी अनिवार्य है।
सरकार ने बच्चों की सुरक्षा के लिए Child Welfare Committees, District Child Protection Units और Special Juvenile Police Units जैसी व्यवस्थाएं भी बनाई हैं।
बच्चों से दोस्त बनकर बात करना जरूरी
इस पूरे मामले से माता-पिता के लिए सबसे बड़ी सीख यही है कि बच्चों से सिर्फ निगरानी के तौर पर नहीं, बल्कि भरोसे के साथ बातचीत भी करनी चाहिए।उन्हें यह समझाना जरूरी है कि अगर कोई बड़ा व्यक्ति उन्हें कोई राज छिपाने के लिए कहता है, लगातार निजी बातचीत करता है, मिलने के लिए दबाव बनाता है या किसी भी तरह असहज महसूस कराता है, तो वे तुरंत अपने माता-पिता या किसी भरोसेमंद वयस्क को इसकी जानकारी दें।

