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नेपाल में बिक रहे हैं सालों से खाली पड़े घर, कुछ की कीमत आईफोन से भी कम; खरीदने में बढ़ी लोगों की दिलचस्पी

नेपाल में बिक रहे हैं सालों से खाली पड़े घर, कुछ की कीमत आईफोन से भी कम; खरीदने में बढ़ी लोगों की दिलचस्पी

नेपाल में सालों से खाली पड़े लाखों घर अब बिक्री के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन घरों को स्थानीय भाषा में ‘अकिया’ कहा जाता है। आबादी के पलायन और गांवों से लोगों के शहरों की ओर जाने के कारण बड़ी संख्या में मकान वर्षों से बंद पड़े हैं। अब इन खाली घरों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिससे स्थानीय और विदेशी खरीदारों की रुचि बढ़ रही है।

इन घरों की कीमत उनके आकार, लोकेशन और मौजूदा स्थिति के आधार पर तय की जा रही है। कुछ पुराने और छोटे मकान इतने कम दाम में उपलब्ध हैं कि उनकी कीमत एक महंगे स्मार्टफोन यानी आईफोन से भी कम बताई जा रही है।

पलायन के कारण खाली हुए घर

नेपाल के कई ग्रामीण इलाकों में रोजगार, शिक्षा और बेहतर सुविधाओं की तलाश में लोग शहरों या विदेशों की ओर चले गए। इसके बाद उनके पुश्तैनी मकान खाली रह गए।

समय के साथ इन घरों की देखभाल नहीं हो पाई और कई मकान जर्जर हालत में पहुंच गए। अब स्थानीय प्रशासन और रियल एस्टेट से जुड़े लोग इन मकानों को दोबारा उपयोग में लाने के प्रयास कर रहे हैं।

कम कीमत में मिल रहे पुराने मकान

खाली पड़े मकानों की कीमत उनके स्थान और स्थिति के अनुसार अलग-अलग रखी जा रही है। कुछ घर काफी पुराने हैं और उन्हें मरम्मत की जरूरत है, इसलिए उनकी कीमत बहुत कम रखी गई है।

कम कीमत में घर खरीदने का मौका मिलने के कारण कई लोग इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। कुछ खरीदार इन मकानों को रेनोवेट कर रहने या पर्यटन से जुड़े कामों में इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं।

विदेशों से भी बढ़ी दिलचस्पी

इन सस्ते मकानों की खबर सामने आने के बाद विदेशों में रहने वाले लोगों की भी रुचि बढ़ी है। सोशल मीडिया पर इस तरह के घरों की जानकारी तेजी से साझा हो रही है।

भारत में भी कई लोग ऐसी खबरें पढ़ने के बाद विदेशों में बसने और कम कीमत में संपत्ति खरीदने के तरीकों के बारे में जानकारी तलाश रहे हैं। हालांकि, किसी दूसरे देश में घर खरीदने से पहले वहां के कानून, वीजा नियम और संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया को समझना जरूरी होता है।

खाली घरों को बचाने की कोशिश

नेपाल में खाली पड़े इन मकानों को फिर से आबाद करने का उद्देश्य सिर्फ बिक्री करना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों को दोबारा सक्रिय बनाना भी है। कई जगहों पर ऐसे घरों को होमस्टे, पर्यटन केंद्र और छोटे व्यवसायों के लिए इस्तेमाल करने की संभावनाएं देखी जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन पुराने मकानों को सही तरीके से विकसित किया जाए तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है और पलायन से प्रभावित इलाकों में नई गतिविधियां शुरू हो सकती हैं।

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